
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए धरती माता द्वारा समस्त मानवता को एक परिवार के रूप में स्वीकारने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि धरती मां के लिए पूरा संसार एक घर की तरह है, जहां हर संस्कृति का अपना महत्व और सम्मान है।एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोकप्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “धरती माता पूरी मानवता को एक परिवार मानती हैं। उनके लिए यह पूरा संसार एक घर की तरह है, जहां हर संस्कृति का अपना महत्त्व और सम्मान है।”उन्होंने आगे संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:- “जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम्। सहस्रं धारा द्रविणस्य मे दुहां ध्रुवेव धेनुरनपस्फुरन्ती ॥”मानवता और विविधता का संदेशपीएम नरेंद्र मोदी ने इस श्लोक का अर्थ बताते हुए कहा कि धरती माता विभिन्न भाषाएं बोलने वाले तथा अलग-अलग धर्मों और परंपराओं का पालन करने वाले लोगों को एक ही परिवार के सदस्य के रूप में अपनाती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर करे यह धरती मां मानवता के लिए समृद्धि की हजारों धाराएं प्रवाहित करती रहे, ठीक वैसे ही जैसे एक शांत और स्नेहमयी गौ माता दूध प्रदान करती है।भारतीय संस्कृति की समावेशी भावना पर जोरप्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के जरिए भारतीय संस्कृति की समावेशी भावना और “वसुधैव कुटुंबकम्” के विचार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की विविध संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान करना ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है।






