
महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि सरकारी वाहनों के लिए विशेष पंजीकरण नंबर लेने पर होने वाला अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार वहन नहीं करेगी। इस तरह का खर्च राज्य के खजाने से करने का कोई प्रावधान नहीं है।
अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के मकसद से सरकार ने यह पहल की है।
महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, यह संज्ञान में आया है कि सरकारी कार्यालय विशेष पंजीकरण (आरटीओ विशेष नंबर) हासिल करने के लिए काफी राशि खर्च कर रहे हैं जबकि सरकारी वाहनों के लिए ऐसे विशेष नंबर लेने की अनुमति देने वाला कोई सरकारी आदेश नहीं है, इसलिए इस मद में किया गया खर्च राज्य के खजाने से नहीं दिया जा सकता।
परिपत्र में कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी या कार्यालय सरकारी वाहन के लिए विशेष नंबर हासिल करने पर राशि खर्च करता है तो उस खर्च की भरपाई के लिए किसी भी परिस्थिति में सरकारी धन स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
वित्त विभाग ने कहा कि सरकार पहले ही वाहनों की मरम्मत एवं रखरखाव, ईंधन और चालकों के वेतन सहित वाहन संबंधी मदों पर काफी धन खर्च करती है। ऐसे में समग्र व्यय में बचत की नीति को ध्यान में रखते हुए वाहन संबंधी खर्च को केवल आवश्यक मदों तक सीमित रखा जाना चाहिए।
यह निर्देश राज्य सरकार के सभी विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों के साथ-साथ ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, वैधानिक एवं स्वायत्त निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर लागू होगा।



