Oplus_16908288
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को पेंशन नियमों की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए, ताकि पेंशन से जुड़े विवाद अदालतों तक पहुंचने से पहले ही रोके जा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य मुकदमेबाजी से मुक्त, सरल और नागरिक-केंद्रित पेंशन व्यवस्था विकसित करना है।
राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेष अभियान का शुभारंभ
नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से आयोजित पेंशन संबंधी अदालती मामलों पर द्वितीय राष्ट्रीय कार्यशाला में डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशन मुकदमेबाजी पर केस कानूनों के संकलन, पेंशन अदालती मामलों संबंधी पर्चे तथा विभाग के तीसरे विशेष अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य मुकदमेबाजी प्रबंधन को मजबूत बनाना, सेवा वितरण में सुधार करना और नागरिक-केंद्रित पेंशन प्रशासन को बढ़ावा देना है।
‘मुकदमे नहीं, नीतिगत सुधार होने चाहिए प्राथमिकता’
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन प्रशासन का उद्देश्य केवल अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा नहीं, बल्कि समय पर नीतिगत सुधारों के जरिए ऐसे विवादों को उत्पन्न होने से रोकना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरल नियम, प्रभावी शिकायत निवारण, मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और बार-बार सामने आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान से मुकदमेबाजी में कमी लाई जा सकती है।
संबंध विच्छेदित बेटियों और पारिवारिक पेंशन सुधारों का किया जिक्र
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने पात्रता शर्तों को सरल बनाकर संबंध विच्छेदित बेटियों को भी पेंशन लाभ देने का फैसला किया है, जिससे कई मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता समाप्त हुई है। उन्होंने पारिवारिक पेंशन संबंधी प्रावधानों में किए गए सुधारों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन बदलावों से लाभार्थियों को न्यायिक हस्तक्षेप के बिना वैध लाभ प्राप्त करने में सुविधा मिली है।
शोध आधारित नीति निर्माण पर दिया जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बार-बार सामने आने वाले मुकदमे इस बात का संकेत होते हैं कि संबंधित नियमों की समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने विभागों से अदालती मामलों के रुझानों का विश्लेषण करने और हितधारकों की प्रतिक्रिया को नीति निर्माण का हिस्सा बनाने का आग्रह किया, ताकि शोध आधारित सुधार लागू किए जा सकें।
डिजिटल और मानव-केंद्रित व्यवस्था दोनों जरूरी
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शिकायत निवारण प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कार्यकुशलता बढ़ी है, लेकिन पेंशनभोगियों के साथ व्यक्तिगत संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने डिजिटल शासन और मानव-केंद्रित सेवा के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। साथ ही पेंशन नियमों को सरल बनाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने तथा अधिकारियों को नीतियों की स्पष्ट समझ देने की आवश्यकता भी बताई।
पेंशनभोगियों की बढ़ती संख्या पर जताई चिंता
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब केंद्रीय सरकार के सेवारत कर्मचारियों की तुलना में पेंशनभोगियों की संख्या अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का अनुभव और विशेषज्ञता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए उनका कल्याण राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
20% घटी पेंशन मुकदमेबाजी, डिजिटल सेवाओं का विस्तार
कार्यक्रम में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव ध्रुबज्योति सेनगुप्ता ने बताया कि मंत्रालयों, कानूनी सलाहकारों और विभागों के बेहतर समन्वय के चलते विभाग की मुकदमेबाजी सूचना प्रबंधन प्रणाली में दर्ज मामलों की संख्या पिछले एक वर्ष में लगभग 20% कम हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक 1.92 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) जारी किए जा चुके हैं, जबकि पेंशन संबंधी शिकायतों के निपटारे का औसत समय घटकर 20 दिन से कम रह गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सिंगल साइन-ऑन और ई-हस्ताक्षरित पेंशन आवेदन प्रणाली के माध्यम से 60 हजार से अधिक आवेदनों पर कार्रवाई की जा चुकी है तथा विभाग ‘एक पेंशनभोगी, एक पोर्टल’ योजना पर काम कर रहा है।






