
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है, पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा से अपना इस्तीफा दे दिया। प्रकाश चिक बड़ाईक का यह कदम वरिष्ठ नेताओं सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे के ठीक बाद आया है।इसके साथ ही, हाल के कुछ दिनों में उच्च सदन से इस्तीफा देने वाले टीएमसी सांसदों की कुल संख्या बढ़कर तीन हो गई है।इन लगातार हो रहे इस्तीफों का सीधा असर संसद में पार्टी की संख्या बल पर पड़ रहा है। बड़ाईक के इस इस्तीफे के साथ ही, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह जाने की संभावना है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अगले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी के कम से कम तीन और राज्यसभा सांसद अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो पार्टी के भीतर चल रहा यह संकट काफी गहरा सकता है।राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपे गए अपने इस्तीफे में बड़ाईक ने कहा कि वह तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता छोड़ रहे हैं। पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं एतद्द्वारा राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं, कृपया इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।”उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान समर्थन के लिए सभापति और सचिवालय का आभार भी व्यक्त किया। पत्र में आगे कहा गया, “मैं महामहिम, माननीय उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी पदाधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान पूरी मदद और सहयोग दिया।”यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर तेज होती आंतरिक कलह के बीच सामने आया है। लगातार हो रहे इस्तीफों और बागी नेताओं के दावों ने पार्टी की एकजुटता और संभावित विलय को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।

बागी टीएमसी नेता रितब्रत बनर्जी ने बुधवार को बागी गुट और कांग्रेस के बीच किसी भी तरह के विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम पूरी तरह से संगठन का आंतरिक मामला है।एएनआई के अनुसार, बनर्जी ने दावा किया कि उनके गुट के पास समर्थन 58 से बढ़कर 64 विधायकों तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “फिलहाल यह संख्या 64 है। ये लोग आकर स्पीकर को पत्र सौंपेंगे।” उन्होंने बताया कि यह गुट अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष से औपचारिक रूप से संपर्क करेगा।विलय की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, “जहां तक विलय का सवाल है, हमारी विधायक दल निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो रही है। संसद में दो-तिहाई से अधिक सांसद भी कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं।”बनर्जी ने कहा कि पार्टी का कोई भी वर्ग चाहे वह सांसद हों, नगर निगम प्रतिनिधि हों, जिला परिषद सदस्य हों या पंचायत सदस्य किसी विलय की ओर नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “कौन किसके साथ विलय कर रहा है? विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता।”



