
भोपाल: मध्य प्रदेश की राज्यसभा सियासत में एक ऐसा सियासी भूचाल सामने आया है, जिसकी उम्मीद कांग्रेस ने सपने में भी नहीं की थी। दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करने वाली बीजेपी ने तीसरी सीट पर बुंदेलखंड के ओबीसी चेहरे महेश केवट को उतारकर पूरा चुनावी गणित ही पलट दी। कुल मिलाकर ये आगामी चुनाव अब दिलचस्प रूप ले लिया है| दिलचस्प बात यह है, कि महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा है।

नगरीय निकाय चुनाव के दौरान उन पर बीजेपी के ही अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लेकिन संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले केवट ने संगठन का भरोसा दोबारा जीता और अप्रैल में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद अब सीधे दिल्ली का टिकट हासिल करने की रेस में आ गए हैं।

केवट समाज के बड़े चेहरे महेश केवट को उतारकर बीजेपी ने बुंदेलखंड में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की चाल चली है।दिग्विजय सिंह की जगह कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था, जो अब तक निर्विरोध जीतने की उम्मीद कर रही थीं।बीजेपी के इस आक्रामक कदम के बाद कांग्रेस लीडरशिप तुरंत एक्टिव हो गई है और अपने विधायकों को एकजुट रखने की माथापच्ची शुरू हो गई है। शनिवार और रविवार को भोपाल में बीजेपी के शीर्ष नेताओं के बीच एससी, एसटी और ओबीसी चेहरों को लेकर लंबा मंथन चला, जिसके बाद दिल्ली से केवट के नाम पर मुहर लगी।

बीजेपी के पास अपने दो उम्मीदवारों तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को जिताने के बाद भी अतिरिक्त वोट बच रहे हैं। यही अतिरिक्त वोट कांग्रेस के किले में सेंध लगाने के लिए काफी हैं। आंकड़ों के खेल में कांग्रेस के पास 5 वोट ज्यादा हैं, लेकिन बीजेपी ने अगर महेश केवट को उतारा है तो जाहिर है कि रणनीति बिना नंबर के नहीं बनी होगी। क्या कांग्रेस के विधायक पाला बदलेंगे ?




