
ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक स्नान यात्रा श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। शहर के सखीचंद घाट नया बाजार, गिरधारी साह हाट और बाटा गली स्थित जगन्नाथ मंदिरों में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का विधि-विधान के साथ महाअभिषेक किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। सखीचंद घाट नया बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर में पंडित समीर कुमार मिश्र, पुजारी सौरभ कुमार मिश्र, आनंद मिश्रा और 11 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के बीच स्नान यात्रा की सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया। बूढ़ानाथ गंगा तट, सरयू नदी, हरिद्वार के गंगाजल और पुरी के समुद्र के पवित्र जल में हल्दी, इत्र और औषधियां मिलाकर भगवान का अभिषेक किया गया। परंपरा के अनुसार 108 कलशों के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ का दिव्य स्नान कराया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य दिवस भी माना जाता है। इसी दिन भगवान अपने भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और स्कंद पुराण में वर्णित 33 करोड़ देवी-देवताओं के साथ स्नान करते हैं। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ 17 दिनों के लिए विशेष एकांतवास में रहेंगे। मान्यता है कि महाअभिषेक के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए इस अवधि में उन्हें औषधीय काढ़ा और जड़ी-बूटियों का भोग लगाया जाता है। मंदिर परंपरा में इस अवधि को ‘अनासार’ कहा जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होंगे। नया बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर के पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। सदियों पुरानी इस परंपरा में स्नान यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है और इसके बाद ही रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। वहीं, बाटा गली स्थित जगन्नाथ मंदिर के पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार, रथ यात्रा से पहले भगवान पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर पुनः गर्भगृह में विराजमान होते हैं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी घर की यात्रा पर निकलते हैं, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है। दशमी तिथि तक मौसी घर में प्रवास के बाद भगवान पुनः अपने धाम लौटते हैं।मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं नगर भ्रमण कर अपने भक्तों के दुख, कष्ट और रोगों को दूर करते हैं तथा सभी को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।





