
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बैतूल में आयोजित ‘आध्यात्मिक जागरण द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार और उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रभावित दुनिया में समाज के हर वर्ग के लिए आध्यात्मिक शुद्धता बेहद जरूरी हो गई है। इसी आधार पर समानता पर आधारित आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो लंबे समय तक टिकाऊ हो।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया तनाव और संघर्षों से घिरी हुई है, ऐसे में ‘आध्यात्मिक जागरण द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों के अनुरूप होती है। उनका प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों से गहरा जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण की भावना के साथ जीने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने खुशी जताई कि ब्रह्माकुमारी संस्था लंबे समय से इसी सोच के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों के अनुरूप काम करने वाले किसी भी संगठन को यह समझना चाहिए कि समाज के किसी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि “सच्चा सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे और साथ ही अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सचेत रहे।”
राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिक जागरण व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने में मदद करता है और उसे सकारात्मक सोच व जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की असली नींव है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे और उन्हें और अधिक मजबूत बनाए।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब समाज इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगा तभी सामंजस्य, समानता और समावेशी विकास की नई धारा विकसित होगी।
अंत में द्रौपदी मुर्मु ने सभी नागरिकों से मिलकर काम करने की अपील करते हुए कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना होगा, जहां आध्यात्मिकता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण समावेशी विकास के मुख्य आधार बनें।




