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भारत का वस्त्र निर्यात वित्त वर्ष 26 में सालाना आधार पर 2.1% बढ़कर 3,16,334.9 करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 25 में 3,09,859.3 करोड़ रुपए था। केंद्र सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का वस्त्र निर्यात मजबूत बना हुआ है।
आरएमजी सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान
सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 में रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) निर्यात सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। इस सेगमेंट में 2.9% की वृद्धि दर्ज की गई और इसका निर्यात मूल्य 1,39,349.6 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
सूती और हथकरघा उत्पादों का निर्यात स्थिर
सूती धागे, कपड़े, मेड-अप्स और हथकरघा उत्पादों का निर्यात लगभग स्थिर रहा। इनकी कुल निर्यात वैल्यू 1,02,399.7 करोड़ रुपए रही, जो पिछले वर्ष के स्तर के आसपास है।
कृत्रिम फाइबर से जुड़े उत्पादों में तेजी
वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, कृत्रिम धागे, कपड़े और तैयार उत्पादों के निर्यात में 3.6% की मजबूत वृद्धि हुई। यह बढ़कर 42,687.8 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष 41,196.0 करोड़ रुपए था।
हस्तशिल्प उत्पादों में 6.1% की बढ़ोतरी
मूल्यवर्धित क्षेत्रों में हस्तनिर्मित कालीनों को छोड़कर हस्तशिल्प उत्पादों में सबसे अधिक 6.1% की वृद्धि दर्ज की गई। इनका निर्यात 15,855.1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
120 देशों तक पहुंचा भारतीय निर्यात
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान भारत का वस्त्र निर्यात 120 गंतव्यों तक पहुंचा, जो वैश्विक स्तर पर बाजार विस्तार का संकेत देता है।
इन प्रमुख बाजारों में दर्ज हुई मजबूत वृद्धि
संयुक्त अरब अमीरात (22.3%), ब्रिटेन (7.8%), जर्मनी (9.9%), स्पेन (15.5%), जापान (20.6%), मिस्र (38.3%), नाइजीरिया (21.4%), सेनेगल (54.4%) और सूडान (205.6%) जैसे बाजारों में निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई।
सरकारी योजनाओं से मिला निर्यात को सहारा
सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए करों में छूट और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के कदम जारी रखे हैं। इसमें आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी जैसी योजनाओं को 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने का फैसला शामिल है।
एफटीए से मिल सकता है आगे और फायदा
भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) एजेंडे में 2025-26 के दौरान महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसका वस्त्र और परिधान क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।





