
भारत के उपराष्ट्रपति एवं इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सप्रू हाउस में आईसीडब्ल्यूए के ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा प्राप्त करने की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानव प्रगति और वैश्विक शांति एक-दूसरे की पूरक हैं। दुनिया में स्थायी शांति और समावेशी विकास तभी संभव है, जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी हितों के लिए सहयोग एवं साझेदारी की भावना से मिलकर काम करें।
उपराष्ट्रपति ने ब्रिक्स समिट के सफल आयोजन के लिए विदेश मंत्री और आईसीडब्ल्यए के उपाध्यक्ष डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टकराव और विरोधाभासों से जूझ रही दुनिया में, ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ को सर्वसम्मति से अपनाना एक बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति का पहला मकसद देशों के बीच अच्छे संबंध बनाना है। इंसानी तरक्की और विश्व शांति साथ-साथ चलनी चाहिए, और यह तभी संभव है जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी फायदे के लिए काम करें।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत शांति, तरक्की और खुशहाली के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात पर जोर दिया और इस सोच को असल में लागू करने के उदाहरण के तौर पर कोविड संकट के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’, भारत की आपदा-प्रबंधन कोशिशों, ‘लाइफ’ और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी वैश्विक पहलों का जिक्र किया।
उपराष्ट्रपति ने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की उपलब्धियों पर जोर देते हुए कहा कि “पारदर्शी पेमेंट सिस्टम से पारदर्शी गवर्नेंस आती है।” उन्होंने कहा कि भारत आईटीईसी और शैक्षिक सहयोग के जरिए ग्लोबल साउथ के साथ अपनी तकनीकी और संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है, जिसमें जांजीबार में भारत के बाहर पहला आईटीआई कैंपस भी शामिल है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल ने आईसीड्ब्ल्यू की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘ग्लोबल साउथ’ और ‘इंडो-पैसिफिक’ प्राथमिकताओं पर रिसर्च को मजबूत करना; साइबर सिक्योरिटी, स्पेस, अहम टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर काम का दायरा बढ़ाना; यूनिवर्सिटी और युवा स्कॉलर्स के साथ जुड़ाव को गहरा करना और दुनिया के मामलों पर भरोसेमंद जानकारी का स्रोत बनना, जिसमें भारत का अपना सही नजरिया हो।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईसीडब्ल्यू को ‘विकसित भारत-2047’ के लिए बौद्धिक और संस्थागत रूप से खुद को तैयार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन के लिए दुनिया के सम्मानित केंद्रों में से एक बनने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि काउंसिल अपनी गोल्डन जुबली तक भारत और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था में और भी बड़ा योगदान देगी। उपराष्ट्रपति ने आसीडब्ल्यूए के सफर और विकास को दिखाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और काउंसिल में योगदान के लिए पूर्व महानिदेशकों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।






