
रायपुर। नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे देशभर के छात्रों की जीत करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
वहीं, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने विजय रैली निकालकर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। इससे पहले नीट पेपर लीक मामले को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने एक्स पर लिखा, “एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। यह भारत के युवाओं की जीत है।” इसके बाद मीडिया से बातचीत में बघेल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हार भी है। भूपेश बघेल ने सरकार की तुलना पौराणिक पात्र हिरण्यकश्यप से करते हुए कहा कि देश का जेन जेड वर्ग नरसिंह अवतार बनकर सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के सामने सरकार और उसकी एजेंसियां टिक नहीं सकीं।
भाजपा पर हमला बोलते हुए बघेल ने सोनम वांगचुक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम कभी सोनम वांगचुक को चीन का एजेंट बताती थी, जबकि बाद में सरकार के मंत्री उनके साथ नजर आए। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर भाजपा किसी के भी साथ खड़ी हो जाती है।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिलासपुर में छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों ने विजय रैली निकाली। रैली के दौरान “छात्र एकता जिंदाबाद” और “एनटीए रद्द करो” जैसे नारे लगाए गए। रैली में शामिल छात्रों का कहना था कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा।
परीक्षा प्रणाली में सुधार और एनटीए को लेकर उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने व्यापक विरोध के बीच इस्तीफा दिया है। हालांकि 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने भी पद छोड़ा था, लेकिन उनका इस्तीफा ‘मी टू’ अभियान के दौरान लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद आया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा व्यवस्था, नीट परीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीयस्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।





