
दिल्ली/हरिद्वार : देश में हालात सामान्य रहे और समीकरण बीजेपी के हितों के अनुरूप परवान चढ़े तो,अब ”वन नेशन वन इलेक्शन’ (‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ ) की थ्योरी वर्ष 2034 नहीं,बल्कि 2029 में साकार हो सकती है | केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके साफ़-साफ़ संकेत दिए है | उनके वक्तयों पर गौर फ़रमाएँ तो,”वन नेशन वन इलेक्शन’ व्यवस्था को लागू करने में अब 2034 तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा,बल्कि इसे 2029 में ही मूर्त रूप दिया जा सकता है|माना जा रहा है,कि जनहित और देश के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए,‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का रास्ता जल्द ही तय किए जाने के आसार है|भारत निर्वाचन आयोग भी,इस मुद्दे पर अपनी कमर कसे हुए है|

बताया जाता है,कि इस थ्योरी को अमल में लाए जाने और चुनावी तैयारी के लिए आयोग को लगभग 6 माह का वक्त लगेगा|हालाँकि,अभी मामला मंथन और समागम स्तर तक ही सीमित बताया जाता है| दरअसल,उत्तराखंड में आयोजित साधु-संतों के एक सम्मलेन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन नेशन वन इलेक्शन’ का राग छेड़ कर मुद्दे को नए सिरे से हवा दे दी है| राजनैतिक गलियारों में चर्चा यह भी है,कि यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा,तो केंद्र सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा सकती है |जानकारों के मुताबिक,बीजेपी शासित 22 से ज्यादा राज्य ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की आवाज बुलंद कर रहे है| जबकि,शेष राजनैतिक दल और उनकी सरकार इस थ्योरी पर पूरी तरह से विश्वास कायम नहीं कर पाई है|

जानकार यह भी तस्दीक करते है,कि ऐसे राज्यों को वन नेशन वन इलेक्शन की प्रक्रिया के लिए राजी करने में लगभग साल भर का वक्त लग सकता है|इस बीच राष्ट्रहित के मद्देनज़र वन नेशन वन इलेक्शन की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सहमति जाहिर करते हुए,इसका स्वागत किया है,कार्यक्रम में मौजूद शिवराज सिंह चौहान ने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति में बाधक बताया है|हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में ”एक राष्ट्र-एक चुनाव” के विचार के समर्थन को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साधु-संतों से अपील की है|उन्होंने संत समाज से इस सांविधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का आह्वान किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राष्ट्रहित,सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बताया। दोनों शीर्ष नेताओं ने इस पहल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की पहल बताया है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक राष्ट्र-एक चुनाव के संकल्प को देश के लिए पहले भी आवश्यक बताया था। उन्होंने इस बार भी कहा, कि बार-बार के चुनाव विकास की गति और जनसेवा को प्रभावित करते हैं। इससे समय, पैसा और प्रशासनिक ऊर्जा का भारी नुकसान होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार चुनावों से स्कूलों में पढ़ाई रुकती है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा,कि हर साल किसी ना किसी राज्य में प्रशासनिक मशीनरी चुनावी तैयारियों में लग जाती है,ऐसे में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों तो संसाधनों की बचत होगी। चुनाव संबंधी समय की भी बचत होगी। इससे प्रशासनिक ध्यान विकास पर केंद्रित रह पाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से अपील की कि वे अपनी उपस्थिति और प्रभाव से जनजागरण में मदद करें। उन्होंने संतों से अपने प्रवचनों में इस विचार का समर्थन करने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। उन्होंने जोर दिया कि देश आगे रहेगा तो पार्टियां भी बनी रहेंगी।




