असम में ग्रीन एनर्जी पर जोर, 2030 तक 6,000 मेगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य: सीएम सरमा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम 2030 तक 6,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य बना रहा है। यह राज्य के भविष्य के आर्थिक विकास के लिए क्लीन एनर्जी को मुख्य आधार बनाने की एक महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, सरमा ने कहा कि ग्रीन एनर्जी असम की ‘अगली विकास गाथा’ का मुख्य हिस्सा होगी। उन्होंने राज्य सरकार के उस फोकस पर जोर दिया जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के उत्पादन को बढ़ाने और साथ ही एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “ग्रीन एनर्जी असम की अगली विकास गाथा का केंद्र होगी। 2030 तक 6,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य रखते हुए, हम एक साफ-सुथरे और एनर्जी के मामले में ज्यादा सुरक्षित असम की नींव रख रहे हैं।” यह लक्ष्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि असम औद्योगिक विस्तार, बुनियादी ढांचे के विकास और शहरीकरण से जुड़ी बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना चाहता है। रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने से राज्य को अपने पावर मिक्स में विविधता लाने और लंबे समय में पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

असम में रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर सोलर पावर की काफी संभावना है, क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में जमीन और अनुकूल मौसम की स्थिति मौजूद है। सरकार अपनी व्यापक विकास रणनीति के तहत क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में ज्यादा प्राइवेट और पब्लिक इन्वेस्टमेंट की कोशिश कर रही है। रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश भर में नॉन-फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन-मुक्त) आधारित बिजली उत्पादन बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिशें चल रही हैं।

असम के लिए, यह नियोजित विस्तार राज्य के उभरते औद्योगिक और निवेश परिदृश्य को सहारा दे सकता है। इससे भरोसेमंद बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी और साथ ही क्लीन-एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और संबंधित क्षेत्रों में अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार बुनियादी ढांचे के विकास और मैन्युफैक्चरिंग व एनर्जी से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश को आकर्षित करने पर भी जोर दे रही है।

हालांकि, 2030 तक 6,000 मेगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादन क्षमता, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन की उपलब्धता और ग्रिड इंटीग्रेशन में भारी निवेश की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री की घोषणा से संकेत मिलता है कि रिन्यूएबल एनर्जी को न केवल पर्यावरण से जुड़ी प्राथमिकता के तौर पर, बल्कि असम की आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर भी देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस लक्ष्य को असल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में बदलने के लिए राज्य को सरकारी एजेंसियों, बिजली कंपनियों और प्राइवेट निवेशकों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास करने होंगे।

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