
रायपुर : रायपुर में 700 करोड़ के कोल खनन परिवहन घोटाले में फंसे टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सेरोगेसी सेंटर के संचालक डॉक्टर पहलाजानी के ख़िलाफ़ बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए है|दरअसल,दो साल पहले शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर में बच्चों की अदला-बदली के मामले में पीड़ितों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था|

अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है,कोर्ट ने रायपुर एसपी को अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके पूर्व पहलाजानी नर्सिंग होम (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जांच के दायरे में लिया था।

राज्य के ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ करोड़ों के कथित नकद लेनदेन और साक्ष्यों से जुड़ें मामले की जांच में ईडी ने उनसे पूछताछ की थी|यह मामला अभी थमा ही नहीं,कि डॉ पहलाजानी के बड़ी संवेदनशील जांच के दायरे में आ गए है| उनकी भूमिका संदिग्ध बताई जाती है|

मामला 25 दिसंबर 2023 का है,जानकारी के मुताबिक,इस दिन पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सेरोगेसी सेंटर में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। शिकायतकर्ता ने इसमें एक लडक़ा और एक लडक़ी के जन्म का दावा किया था। आरोप है,कि जन्म के कुछ देर बाद डॉक्टर ने पीड़ित को दो लड़कियां सौंप दीं थी।

पीड़ित की शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे| इस पूरे मामले का पटाक्षेप उस वक्त हुआ जब विवाद सामने आने के बाद डीएनए जांच हुई|डीएनए जांच में पाया गया कि पीड़ित को सौंपी गई एक बच्ची अपने माता-पिता की जैविक संतान थी, लेकिन दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता पिता से मेल नहीं खाता था। डीएनए रिपोर्ट के बाद पीड़ित परिवार का बच्चा अदला-बदली का आरोप प्रमाणित पाया गया था|

जानकारी के मुताबिक,असलियत सामने आने के बावजूद पीड़ित परिवार की शिकायत को तत्कालीन अधिकारियों ने रफ़ा-दफ़ा कर दिया था|बताया गया,कि पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के ख़िलाफ़ पुलिस में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की तो,तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में 6 डॉक्टरों की एक अन्य टीम बना कर पुनः मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी थी।

यह भी बताया जाता है,कि बच्चा चोर गिरोह के साथ रसूखदार डॉक्टरों की सांठगांठ सामने आने से पीड़ितों ने हैरानी जताई थी|पीड़ितों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन कानूनी दांव पेचों के चलते पीड़ितों की ओर से दायर याचिका खारिज हो गई। हालाँकि,हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने प्रकरण की सुनवाई की और माना कि मामला गंभीर और जांच के योग्य है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी गंभीर सवाल खड़े किए है|दालत ने पहलाजानी सरोगेसी सेंटर के संचालक, मेडिकल बोर्ड के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का फ़रमान जारी किया है|बताया जा रहा है,कि रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर सकती है|
विकासशील सरकार की नाक के नीचे चूहों का आतंक, छत्तीसगढ़ में 19 करोड़ का धान चूहें चट कर गए या अफसर ? खोजेंगे सुशासन बाबू …







