
इंदौर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सिखाती है कि कृषि केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता के पोषण, प्रकृति के संरक्षण और विश्व कल्याण का आधार है। इसी भावना के साथ आज इंदौर में आयोजित 16वें ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ सफल समापन हुआ।
केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान शनिवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों के समापन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है। इसमें खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहनीय खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाले कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों के साथ खाद्य सुरक्षा, पौष्टिक आहार, किसानों की आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, जलवायु-सहिष्णु खेती तथा सतत कृषि विकास जैसे विषयों पर व्यापक, सार्थक और परिणामोन्मुखी विचार-विमर्श हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहयोगी मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि कृषि समूह की मंत्री स्तरीय तथा उससे पहले अधिकारी स्तरीय, दोनों बैठकें सानंद, सार्थक और सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रश्न पर ब्रिक्स देशों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और गंभीरता है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है, इसलिए इनकी सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति के रूप में उभरी है। उन्होंने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और ब्रिक्स के कृषि समूह की दोनों बैठकें-अधिकारी स्तर और मंत्री स्तर, इसी परिप्रेक्ष्य में इंदौर में हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विमर्श हुआ-दुनिया और ब्रिक्स देशों की खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) और पौष्टिक आहार, ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियाँ, खाद्य प्रणालियों और कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और साझेदारी को मजबूत करना। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि भरपूर अनाज उपलब्ध हो, साथ ही पोषणयुक्त भोजन भी सभी तक पहुंचे और जो अन्नदाता किसान दुनिया को भोजन देता है, उसकी आजीविका सुरक्षित और बेहतर हो, इन्हीं सवालों को बैठक की सोच के केंद्र में रखा गया।




