
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने लंबी अनुशासनात्मक जांच के बाद एजीएमयूटी कैडर की 2003 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मा जायसवाल को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उन पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे थे।जानकारी के मुताबिक, यह मामला साल 2007-08 का है, जब पद्मा जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात थीं। जांच में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी निधि के गलत इस्तेमाल के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया।

अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश यानी एजीएमयूटी कैडर को नियंत्रित करने वाले गृह मंत्रालय ने औपचारिक जांच पूरी होने के बाद उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक प्रक्रिया में पद्मा जायसवाल को गंभीर कदाचार का दोषी माना गया। इसके बाद उन्हें सेवा से हटाने की सख्त सजा दी गई, जिससे उनका प्रशासनिक करियर पूरी तरह समाप्त हो गया।सरकार की यह कार्रवाई नौकरशाही में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है, लेकिन इसे वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में बड़ा संदेश माना जा रहा है।पद्मा जायसवाल ने वर्ष 2003 में आईएएस सेवा जॉइन की थी और उन्होंने एजीएमयूटी कैडर के तहत कई केंद्र शासित प्रदेशों और पूर्वोत्तर राज्यों में जिम्मेदारियां संभाली थीं। हालांकि, करीब दो दशक पुराने मामले में अब जाकर कार्रवाई होने से जांच प्रक्रिया की लंबी अवधि भी चर्चा में है।सरकार का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके तहत उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी पद और सेवा संबंधी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया है।


