
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली माताओं को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अब तीन महीने से बड़े बच्चों को गोद लेने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) का लाभ मिलेगा। कोर्ट ने उस नियम को रद्द कर दिया है, जिसमें सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही छुट्टी देने की बात कही गई थी।जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन माना। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मातृत्व केवल जैविक नहीं, बल्कि भावनात्मक संबंध भी है और यह एक मूल मानव अधिकार है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गोद लिए गए बच्चे को नए परिवार में ढलने के लिए समय चाहिए और मां का स्नेह उसका अधिकार है। अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार भी इस मामले में लागू होता है।यह मामला हंसानंदिनी नंदूरी की याचिका के जरिए सामने आया था, जिसमें 1961 के मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट और बाद में लागू 2020 के सोशल सिक्योरिटी कोड के प्रावधान को चुनौती दी गई थी। इन कानूनों में केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर 12 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान था, जिसे कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि परिवार और मातृत्व सिर्फ जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित होता है। साथ ही कोर्ट ने सरकार को यह सुझाव भी दिया कि गोद लेने वाले पुरुषों के लिए पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) पर भी विचार किया जाना चाहिए।




