
रायपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय की निष्क्रियता के चलते छत्तीसगढ़ में पुलिस तंत्र का अपराधिकरण जोरो पर है,इसका खामियाज़ा राज्य की बीजेपी सरकार को उठाना पड़ रहा है|पुलिस मुख्यालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन की मान-प्रतिष्ठा दांव पर है|प्रदेश में कानून व्यवस्था की कमजोर कड़ी के साथ-साथ कई इलाकों में अफीम की बेरोक-टोक अवैध खेती के मामले में पुलिस महकमे की लचर भूमिका से बीजेपी सरकार मुश्किल में है|जबकि,वर्दी में जारी अपराधों के सिलसिले से पुलिस की छवि ना केवल धूमिल हो चुकी है,बल्कि दागी और निलंबित पुलिस अधिकारियों को मिल रहे अनुचित सरकारी और राजनैतिक संरक्षण से “सुशासन” का दम निकल रहा है |

कारोबारी दीपक टंडन मामले में जाँच में दोषी पाई गई DSP कल्पना वर्मा की पिछले दरवाज़े’ से बहाली की तैयारी से पुलिस मुख्यालय में पदस्थ ईमानदार छवि के कई अधिकारी हैरत में है उन्हें समझ में नहीं आ रहा है,कि वर्दी में अपराधों को अंजाम देने के बावजूद सिस्टम निलंबित DSP के ढाल का काम क्यों कर रहा है ? नक्सल गोपनीयता लीक के आरोप सिद्ध फिर भी राहत क्यों ?

निलंबित DSP कल्पना वर्मा केस में बड़ा खेल सामने आया है|राज्य सरकार ने निलंबन अवधि में उन्हें पुलिस मुख्यालय रायपुर अटैच किया था|लेकिन वे यहाँ से नदारद है,उन्हें,गाहे-बगाहे ही रायपुर में देखा जाता है जबकि,उनकी मौज-मस्ती का कार्यस्थल में बदलाव करने का मामला सिस्टम की किसी “मेहरबानी” से कम नहीं बताया जा रहा है| निलंबित DSP पर आखिर किसकी मेहरबानी अभी भी बरस रही है| जाँच रिपोर्ट में अपराधों की पुष्टि के बावजूद पीड़ित को कानूनी राहत प्रदान नहीं होने से PHQ की भूमिका सवालों के घेरे में बताई जाती है| वरिष्ठों की कृपा ऐसी बरस रही है,कि कल्पना वर्मा पर FIR तक दर्ज नहीं कराई गई है| जबकि,पिछले दरवाज़े से उनकी बहाली की मुहिम भी जोरो पर जारी बताई जाती है |

छत्तीसगढ़ में प्रेम-प्रसंग की आड़ में उगाही और नक्सली गोपनीयता भंग करने के मामलों में लिप्त पाई गई निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा पर वरिष्ठ अधिकारियों की गैर जरुरी मेहरबानियां सुर्ख़ियों में है|होटल कारोबारी दीपक टंडन और डीएसपी कल्पना वर्मा विवाद सामने आने के बाद जाँच रिपोर्ट में डीएसपी की कार्यप्रणाली को आपराधिक दायरे में पाया गया था|उनके ऊपर लगे ज्यादातर आरोप सिद्ध पाए गए थे, बवाल मचने के बाद जाँच रिपोर्ट के तथ्यों पर गौर करते हुए राज्य सरकार ने डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित कर दिया था|जानकारी के मुताबिक,5 फरवरी 2026 को निलंबित की गई कल्पना वर्मा के खिलाफ ना तो अब तक FIR दर्ज़ की गई है,और ना ही पीड़ित शख्स को उसकी कार एवं अन्य कीमती वस्तुओं की वापसी के लिए पुलिस महकमे द्वारा कोई कानूनी कदम उठाए गए है|

जानकारी सामने आ रही है,कि निलंबन अवधि में पुलिस मुख्यालय रायपुर में अटैच की गई,डीएसपी कल्पना वर्मा अपने कार्य स्थल पर ना तो उपस्थित हो रही है,और ना ही छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया है|अलबत्ता,जानकारी सामने आ रही है,कि पुलिस मुख्यालय में अटैच किए जाने के राज्य सरकार के आदेश को धत्ता बताते हुए,पुलिस के ही वरिष्ठ अधिकारियों ने निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा को बस्तर के सैर-सपाटे पर भेज दिया है | जबकि,नक्सली ऑपरेशन की गोपनीयता भंग करने जैसे ही गंभीर आरोपों के चलते उन पर निलंबन की गाज गिरी थी| प्राथमिक जाँच में ही सिद्ध पाई गई डीएसपी कल्पना वर्मा पर कार्यवाही के नाम पर विभागीय खानापूर्ति इन दिनों चर्चा में है |

पुलिस सूत्रों के मुताबिक,निलंबित डीएसपी पर प्रभावशील अधिकारियों की कृपा बरसने का सिलसिला जस का तस कायम है| उनकी दिन-रात खैरियत पूछने वाले अधिकारियों की पुलिस मुख्यालय में कोई कमी नहीं बताई जाती है|यह भी बताया जा रहा है,कि कारोबारी दीपक टंडन की पत्नी की कार कई महीनों से निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा के कब्जे में है| जबकि,इस कार की किश्त की अदायगी आज भी प्रति माह दीपक टंडन की पत्नी बरखा टंडन द्वारा की जा रही है|यही नहीं,जाँच रिपोर्ट में आर्थिक लेन-देन और कीमती आभूषणों की भेंट की वापसी को लेकर पीड़ित परिवार इंसाफ की गुहार लगा रहा है|

दागी अफसर पर मेहरबानी के मामलो की जानकारी रखने वाले तस्दीक करते है,कि पुलिस मुख्यालय में अटैच निलंबित अधिकारी,सबकी निगाहों में होता है,इसलिए यहां से बच निकलने के लिए तिकड़में जोरो पर चलती है|जबकि दंतेवाड़ा और बस्तर में अटैच अधिकारी अपनी मनमर्जी का मालिक होता है ? पुलिस मुख्यालय से परे दूरस्थ अंचलों में अटैच ऐसे निलंबित अधिकारियों की कार्यस्थल में उपस्थिति का मामला सिर्फ औपचारिक बन कर रह जाता है| निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा के प्रकरण को इसी कृपा से जोड़कर देखा जा रहा है| बताया जाता है,कि रायपुर में पुलिस मुख्यालय में अटैच की गई डीएसपी कल्पना वर्मा ने अपने कार्यस्थल पुलिस मुख्यालय से दूरियां बना ली है | इस कृपा को वरिष्ठों अधिकारियों की मेहरबानी और ऊँची पहुँच की बानगी के रूप में देखा जा रहा है|

यह भी सवाल उठ रहा है,कि राज्य सरकार ने कल्पना वर्मा को निलंबन अवधि में आदेश जारी कर जब पुलिस मुख्यालय में अटैच किया गया है,तो रातों-रात इस आदेश में फेरबदल किस अधिकारी ने किया है ? न्यूज़ टुडे की पड़ताल में यह साफ़ नहीं हो पाया,कि पुलिस मुख्यालय अटैच की गई निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा के अटैचमेंट का नया ऑर्डर जारी किया गया है ? राज्य सरकार के निलंबन आदेश जारी होने के बाद क्या दूसरा कोई नया आदेश भी कल्पना वर्मा के पक्ष में जारी किया गया था ?

उनकी पुलिस मुख्यालय में गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बनाई हुई है,हालांकि,पुलिस मुख्यालय की ओर से आधिकारिक रूप से यह साफ़ नहीं किया गया है,कि निलंबन अवधि में डीएसपी कल्पना वर्मा आखिर किस कार्यस्थल पर तैनात की गई है ? यदि वे पुलिस मुख्यालय में नहीं है,तो कहाँ पदस्थ है ? चर्चा यह भी है,कि प्रभावशील अधिकारियों का एक खास वर्ग कल्पना वर्मा को पिछले दरवाजे से बहाल करने की क़वायतों में दिन-रात जुटा हुआ है|

जानकारी के मुताबिक,रायपुर पुलिस की जांच रिपोर्ट सामने आने की अवधि बीते लंबा वक्त गुजर चुका है,बावजूद इसके निलंबित डीएसपी को ना तो विभागीय जांच संबंधी आरोप पत्र जारी किया गया है,और ना ही पुलिस मुख्यालय ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए है| दीपक टंडन बनाम डीएसपी कल्पना वर्मा मामले ने पुलिस की छवि पर सवालियां निशान लगा दिया है |वर्दी में प्यार और तकरार के मामले महकमे में कोई नई बात नहीं है,लेकिन इस घटना क्रम में अपराध और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग जैसे तथ्य सामने आने के बाद “पुलिस सिस्टम” पर ही सवाल खड़े हो गए है| पुलिस मुख्यालय की बेरुखी से राज्य सरकार की छवि पर भी गहरा आघात पहुँचा है| जानकारों के मुताबिक,जब पुलिस मुख्यालय में ही सुशासन के दावों की हवा निकाली जा रही है,तो मैदानी इलाकों में तैनात महकमे का क्या हाल होगा ? इसका सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है|

यह भी बताया जा रहा है,कि पुलिस मुख्यालय की लचीली कार्यप्रणाली से प्रदेश के कई जिलों में वर्दी में अपराधों का सिलसिला जोरों पर है,वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (IPS) के यौन प्रसंगों के मामलों की जहाँ झड़ी लगी हुई है,वही बेलगाम अधिकारियों की लगाम कसने के मामले में पुलिस मुख्यालय फिसड्डी साबित हुआ है|कतिपय आईपीएस अधिकारियों की तर्ज पर ASP,DSP और थानेदार स्तर के दर्जनों अधिकारी वर्दी में गंभीर अपराधों को अंजाम देने से गुरेज नहीं कर रहे है|कही कारोबारियों और आम नागरिकों से “खुली लूट” की घटनाएं तो कही वर्दी में यौन अपराधों का सिलसिला जारी है| बिलासपुर में स्पा सेंटर संचालक से अवैध वसूली मामले में तत्कालीन एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल पर निलंबन की गिरी गाज को अब राहत में तब्दील करने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाएं जाने की जानकारी भी सामने आई है| जबकि,डीएसपी कल्पना वर्मा भी इसी तर्ज पर वरिष्ठों की राहत के इंतज़ार में बताई जाती है|

यही नहीं,यौन अपराधों के अलावा वर्दी में अन्य गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले कई थानेदारों और अन्य स्तर के अफसर भी चैन की बंसी बजा रहे है| कोर्ट-कचहरी में मामले लंबित होने के बावजूद ऐसे पुलिस अधिकारियों को मैदानी इलाको के थाने की बागडोर सौंप दी गई है| कई पीड़ित परिवार पुलिस मुख्यालय से ऐसे दागी अफसरों पर वैधानिक कार्यवाही की मांग लंबे समय से कर रहा है| पुलिस मुख्यालय की बेरुखी से वर्दी में अपराधों का सिलसिला नई ऊंचाइयां तय कर रहा है| उसकी निष्क्रियता से दागी पुलिस अफसरों के हौसले बुलंद बताए जाते है|देखना गौरतलब होगा,कि निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा को कानून का पाठ पढ़ाया जाएगा या फिर पिछले दरवाजे से जारी कृपा यूँ ही अपना सफर तय करेगी|फ़िलहाल, दीपक टंडन और उनका पीड़ित परिवार अपने कीमती सामानों की वापसी के लिए पुलिस मुख्यालय के चक्कर काट रहा है|
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