
अयोध्या : अयोध्या नगरी राम धुन से गूंज रही है,दर्शन के लिए रामलला के गर्भगृह से लेकर कई कोस दूर तक राम जन्मोत्सव का जश्न देखने मिल रहा है| रामलला की एक झलक पाने के लिए अयोध्या के मंदिर में भक्तों का सैलाब टूट पड़ा है | रामलला के सूर्य तिलक के रहस्य का मुद्दा इन भक्तों की जुबान पर है|उनकी जिज्ञासा इस बात को लेकर है,कि आखिर कैसे बड़ी-बड़ी दीवारों को चीर कर सूर्य की किरणे रामलला के ललाट पर पड़ रही है| इस अद्भुत नज़ारे को जिसने भी देखा,वो देखता ही रह गया | उनकी निगाहें लगभग 4 मिनट तक रामलला के “मस्तक” पर टिकी रही| जैसे ही राम जन्म की घडी निकट आई,गर्भगृह का अँधेरा कमरा सूर्य की रौशनी से जगमगा उठा | सूर्य की चमकीली किरणें रामलला के ललाट पर गोलाकार तिलक की तर्ज पर रौशन होते रही| इस नज़ारे को आम भक्तों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बड़े करीब से देखा और x पोस्ट पर अपने अनुभव भी साझा किए| विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत मिलन देख कर पीएम मोदी भी गदगद नजर आए |

अयोध्या में 4 शीशे,4 लेंस और 4 मिनट के सूर्य तिलक की चर्चा जोरों पर है | इस अद्भुत संयोग से रूबरू हुए भक्त इस नज़ारे को अपने मन में बसाए हुए है| मंदिर में सूर्य तिलक को प्रत्यक्ष देखने का अनुभव जिन लोगों संभव हुआ उनकी आँखों में रामलला के ललाट की तस्वीरें रच-बस गई है| बताते है,कि इस ऐतिहासिक क्षण में भक्तों की निगाहे लगभग 4 मिनट तक रामलला के ललाट पर टिकी रही | ये वो वक्त था,जब सूर्य और गर्भगृह एक धुरी पर थे| साइंस और अध्यात्म का अनूठा मेल अद्भुत रूप से राम मंदिर में नजर आया |

प्रकाश का परावर्तन अर्थात Reflection of Light की थ्योरी स्कूल में आप ने जरूर पढ़ी होगी| लेकिन,रामलला के मंदिर में ये थ्योरी हूबहू जमीन पर उतरते नजर आई| ये संभव हुआ,4 शीशे और 4 लेंस के जरिए लगभग 4 मिनट का सूर्य तिलक विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम था| ये नजारा सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है। सूर्य तिलक के लिए 65 फीट लंबे इस सिस्टम में 4 लेंस और 4 मिरर (दर्पण) लगे हैं, जो अष्टधातु के पाइप के जरिए काम करते हैं।मिरर के तीसरे तल पर लगे पहले दर्पण पर सूरज की किरणें जैसी ही पड़ी 90 डिग्री पर यह रिफ्लेक्टकरके, लेंस और दर्पणों की एक श्रृंखला के जरिए गर्भगृह में रामलला के मस्तक तक पहुंच गई| इस सिस्टम को सूर्य की किरणों को सीधे रामलला के माथे पर लगभग 75 मिलीमीटर के गोलाकार तिलक के रूप में चमकाने केलिए खासतौर पर तैयार किया गया था | विशेष रूप से रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजते ही सिस्टम ने अपना काम किया और सीधे सूर्य तिलक का नजारा देखने मिला| देशभर में रामलला के सूर्य तिलक की चर्चा हो रही है| जानकारों के मुताबिक,इस अद्भुत सूर्य तिलक के लिए खगोलीय गणना और निर्माण-तकनीक का उपयोग किया गया है।

रामनवमी के पावन पर्व पर पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। अयोध्या नगरी के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला का दिव्य सूर्य तिलक किया गया, जिसे देख कर देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के श्रद्धालुओं को भावुक हो उठे। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण के साक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बने। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास पर टीवी के माध्यम से रामलला के सूर्य तिलक का सीधा प्रसारण देखा। जैसे ही सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ीं, उस दिव्य पल को देखकर पीएम मोदी भावुक हो उठे। इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पीएम ने तालियां बजाईं| इस ऐतिहासिक क्षण को पूरे समय वे श्रद्धा के साथ निहारते रहे| जब आधुनिक तकनीक के जरिए सूर्य की किरणों को निर्धारित समय पर रामलला के मस्तक तक पहुंचाया गया, जिसे लेकर देशभर में खास उत्साह रहा।रामनवमी के इस अवसर पर अयोध्या में लाखों श्रद्धालु मौजूद है,रामलला के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही है| जबकि टीवी और डिजिटल माध्यमों के जरिए इस दिव्य दृश्य को सोशल मीडिया में भी करोड़ो लोग देख रहे है |




