
दिल्ली : ईरान में अमेरिकी बमबारी से लोगों का हाल बेहाल है| लेकिन,ऐसी तस्वीरें आ रही है,जिससे साफ़ हो रहा है,कि खामेनेई ने महिलाओं का जीना मुहाल कर रखा था| उसके मौत के बाद से जहाँ खामेनेई समर्थकों का गुस्सा अमेरिकी तंत्र में आग उगल रहा है,वही महिलाएं जोर जबरदस्ती लादे गए सामाजिक-धार्मिक बंधनों को तोड़कर खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर उतर रही है| ईरान की सड़कों से महिला आज़ादी की तस्वीरें आ रही है,उनके जश्न के वीडियो भी वायरल है| देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती महिलाओं के क्रियाकलाप नजर आने से अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि यहां की महिलाएं अब सदियों पुरानी गुलामी और पुराने ख्यालों से तेज़ी से बाहर आ रही है| सड़कों में आम होते यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती के प्रतीक के रूप में सामने आ रही है| खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद कई महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में एक नई बहस छेड़ दी है| सवाल उठ रहा है,कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की नई शुरुआत ?
युद्ध की मार झेल रहे ईरान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए है| हिजाब नियमों और सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ उठी आवाजों में महिलाओं ने खुलकर खामेनेई सत्ता का विरोध शुरू कर दिया है | खामेनेई की तस्वीर जलाकर सिगरेट जलाना सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध नहीं,बल्कि डर की दीवार टूटने के संकेत के रूप में माना जा रहा है| देश के कई हिस्सों से सामने आ रही
तस्वीरों में महिलाएं ग्लास टकराकर जश्न मनाती दिख रही हैं.

दावा किया जा रहा है कि यह जश्न खामेनेई की मौत की खबर के बाद का है. सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को लाखों बार शेयर किया जा रहा है | इसके साथ यह बहस शुरू हो गई है,कि क्या ईरान का समाज बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है ?पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया था | लेकिन विरोध की आवाज अब तक खत्म नहीं हुई.अपितु आंदोलन और तेज हो गया है.खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे रहा है. महिलाओं को अब अपना भविष्य सुरक्षित नज़र आ रहा है | हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ पुरुष प्रधान व्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी के रूप में भी देखा जा रहा है |




