
नई दिल्ली : – नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय भी शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की बताई जा रही है। अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में घरों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल में सेना और सुरक्षा बलों ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हादसे पर दुख जताया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। भारत की ओर से राहत सामग्री और बचाव सहायता भेजने की तैयारी की जा रही है। भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन भी सक्रिय की गई हैं। वहीं, नेपाल में नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। नेपाली सेना ने कई हेलीकॉप्टरों को राहत और बचाव अभियान में लगाया है और अब तक कई लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लगातार बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर के कारण भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास खतरा अभी भी बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि भूकंप के कुछ ही मिनट बाद अचानक बाढ़ आने से हालात बेकाबू हुए। शुरुआती जांच में लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से भारी मलबे वाली बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। बाढ़ का पानी और मलबा कई किलोमीटर तक फैल गया, जिससे सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ का असर देखने को मिला है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज बहाव के बीच इमारतों, गाड़ियों और पुलों के बहने की तस्वीरें सामने आई हैं। प्रशासन ने लोगों से नदियों और प्रभावित इलाकों से दूर रहने की अपील की है, जबकि लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य लगातार जारी है।







