
दिल्ली अब अपने विकास की दिशा बदलने की तैयारी में है। बढ़ती आबादी और सीमित जमीन के बीच मास्टर प्लान-2047 में शहर को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊंचाई में विकसित करने का खाका तैयार किया गया है। हाईराइज इमारतों को बढ़ावा देकर कम जमीन में ज्यादा आवास और कारोबारी गतिविधियों को जगह देने की योजना है। हालांकि लुटियंस बंगला जोन, एयरपोर्ट और घनी आबादी वाले इलाकों को इस बदलाव से अलग रखा गया है।

इस नए मॉडल की तस्वीर अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के आसपास साफ दिखाई दे सकती है। अलीपुर से बवाना, रोहिणी, नजफगढ़ और द्वारका होते हुए महिपालपुर तक जाने वाली सड़क के दोनों ओर करीब 250 मीटर के दायरे में हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है। बड़े भूखंडों में सड़क, पार्क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन देने के बदले बाकी हिस्से में ज्यादा निर्माण की अनुमति मिल सकती है। यानी कम जमीन में ज्यादा लोगों के रहने और काम करने की व्यवस्था तैयार करने पर जोर है।

मास्टर प्लान में हाईराइज प्रोजेक्ट्स के साथ किफायती आवास और बेहतर कनेक्टिविटी पर भी ध्यान दिया गया है। परियोजनाओं के कुल फ्लोर एरिया का 20 फीसदी हिस्सा छोटे घरों के लिए रखने का प्रावधान है, जबकि मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच के लिए स्काईवॉक, पैदल मार्ग और भूमिगत रास्ते बनाए जा सकते हैं। इमारतों की ऊंचाई पर कोई एक समान सीमा तय नहीं होगी, बल्कि एयरपोर्ट अथॉरिटी, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों की मंजूरी के आधार पर ऊंचाई तय होगी। साथ ही कम से कम 15 फीसदी क्षेत्र में हरियाली रखने की शर्त होगी। यानी मास्टर प्लान-2047 दिल्ली को एक ऐसे वर्टिकल शहर में बदलने की दिशा में कदम है, जहां विकास का रास्ता जमीन से ज्यादा आसमान की ओर होगा।







