
एसएससी समेत ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नोएडा एसटीएफ की गिरफ्त में आए लोकेश से पूछताछ के बाद सामने आया है कि नकल का यह नेटवर्क सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी पहुंच परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं तक भी थी। गिरोह से जुड़े लोग परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर सिस्टम, तकनीकी व्यवस्था और निगरानी तंत्र की जानकारी हासिल कर नकल कराने की रणनीति तैयार करते थे। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि परीक्षा केंद्रों से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
एसटीएफ के मुताबिक लोकेश लंबे समय से इस नेटवर्क के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार कर रहा था। उसके पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद हुई हैं। जांच में पता चला है कि वर्ष 2017 से वह इस तरह के उपकरण तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को सप्लाई करता था। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन उपकरणों की सप्लाई किन गिरोहों को की गई और उनका इस्तेमाल किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं में हुआ।
एसटीएफ एसपी राजकुमार मिश्र के अनुसार अलग-अलग परीक्षाओं के पैटर्न और जरूरत के हिसाब से उपकरण तैयार किए जाते थे, जिससे यह पूरा मामला एक संगठित और लंबे समय से चल रहे नेटवर्क की ओर इशारा करता है। 22 मई 2026 को नॉलेज पार्क के एक परीक्षा केंद्र में एसएससी ऑनलाइन परीक्षा के दौरान प्रॉक्सी सर्वर और सर्वर हैकिंग के जरिए नकल का मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई थी। इसी मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान लोकेश तक एसटीएफ पहुंची। अब दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत अन्य ऑनलाइन परीक्षाओं को भी जांच से जोड़ा जा रहा है। एजेंसी परीक्षा की तारीखों और उपकरणों की सप्लाई के बीच कड़ी तलाश रही है, साथ ही संदिग्ध परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ की भूमिका भी खंगाली जा रही है।







