
रायपुर : – इस बार स्वतंत्रता दिवस छत्तीसगढ़ के लिए खास गौरव लेकर आया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘एट होम’ समारोह के निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और बस्तर की पारंपरिक कला को विशेष जगह दी गई है। इस निमंत्रण पत्र पर बस्तर की पारंपरिक पिटवा कला और ढोकरा यानी बेल मेटल शिल्प में उकेरी गई लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ की प्रतीकात्मक आकृति शामिल की गई है। राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र पर इस लोकगाथा का स्थान मिलना बस्तर की लोककला के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस आमंत्रण पत्र में गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक कलाओं के साथ छत्तीसगढ़ की कला को भी जगह मिली है।

करीब 300 साल पुरानी है झिटकू-मिटकी की लोकगाथा
बस्तर की झिटकू-मिटकी की लोकगाथा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। यह कहानी केवल दो प्रेमियों की कथा नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा कला में झिटकू-मिटकी की प्रतिमाओं को खास स्थान दिया जाता है। इनकी प्रतिमाएं लंबे समय से सम्मान और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के तौर पर भी भेंट की जाती रही हैं।

राष्ट्रपति को भी भेंट की गई थी कलाकृति
हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की ओर से झिटकू-मिटकी की ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई थी। अब स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक ‘एट होम’ निमंत्रण पत्र में इस लोकगाथा की प्रतीकात्मक आकृति को शामिल किया जाना बस्तर की कला और संस्कृति के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

लोककला को मिलेगी नई पहचान
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि झिटकू-मिटकी की लोकगाथा सदियों से बस्तर के जनजीवन और लोकआस्था का हिस्सा रही है। राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र में इसे जगह मिलना हर बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का विषय है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस लोक प्रतीक को मिली पहचान से बस्तर की पारंपरिक कला और संस्कृति को आने वाले समय में नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है।





