
संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध अब भी खत्म होता नहीं दिख रहा। विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच गुरुवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। रिजिजू ने इस बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सरकार विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखने और संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या राहुल गांधी से हुई बातचीत संसद का गतिरोध खत्म करने की दिशा में पहला कदम साबित होगी?
रिजिजू ने बताया कि राहुल गांधी के साथ एक विशेष मुद्दे के अलावा कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकार कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के साथ बेहतर समन्वय चाहती है। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विरोधी होना, दुश्मन होना नहीं है।
लगातार ठप हो रही संसद… आखिर इसका नुकसान किसे हो रहा है?
संसदीय कार्य मंत्री ने संसद की बार-बार बाधित हो रही कार्यवाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में यह संदेश जा रहा है कि विपक्ष सदन को चलने नहीं देना चाहता। रिजिजू ने सवाल उठाया कि संसद ठप रहने से आखिर नुकसान किसका हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और विधायी कामकाज का सुचारु रूप से चलना बेहद जरूरी है।
गृह मंत्री की मौजूदगी पर विपक्ष के आरोपों का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर भी रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमित शाह सुबह से शाम तक संसद में मौजूद रहते हैं और सदन में कई विधेयक भी पेश कर चुके हैं। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि संसदीय परंपरा और नियमों के अनुसार, जिस मंत्री का विधेयक चर्चा में होता है, उसी की सदन में उपस्थिति आवश्यक होती है।







