
उज्जैन: भगवान महाकाल की 10 अगस्त को निकलने वाली श्रावण मास की दूसरी शाही सवारी इस बार सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि श्यामू हाथी के लिए भी बेहद खास होगी। वर्ष 2016 में पहली बार बाबा महाकाल की सेवा में शामिल हुआ श्यामू इस बार अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे करेगा। इस खास मौके पर वह परंपरा के अनुसार पूरे दिन उपवास रखेगा और भगवान की सवारी संपन्न होने के बाद ही अन्न ग्रहण करेगा।

सवारी वाले दिन सुबह से ही श्यामू की दिनचर्या बदल जाती है। उसके मालिक श्रवण गिरी महाराज बताते हैं कि सोमवार की सुबह से ही श्यामू उत्साहित दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे उसे पहले से ही आभास हो जाता है कि आज उसे बाबा महाकाल की सेवा का सौभाग्य मिलने वाला है। सुबह सबसे पहले श्यामू को स्नान कराया जाएगा और फिर आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। मंदिर रवाना होने से पहले उसे भोजन नहीं, बल्कि फलाहार कराया जाएगा। करीब 30 किलो ककड़ी, 10 किलो तरबूज, 10 किलो केले और 10 किलो पपीता खिलाने के बाद वह महाकाल मंदिर के लिए रवाना होगा। मंदिर पहुंचने पर श्यामू की पीठ पर चांदी का हौदा सजाया जाएगा, जिसमें भगवान महाकाल मनमहेश स्वरूप में विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। शाही सवारी पूरी होने के बाद शाम को जब श्यामू अपने निवास लौटेगा, तभी उसका उपवास समाप्त होगा और उसे हरी घास, चोकर और आटे से बना पौष्टिक भोजन कराया जाएगा।

श्रवण गिरी महाराज का कहना है कि कुछ लोगों ने श्यामू को महाकाल की सेवा से दूर करने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार बाबा महाकाल की कृपा से उसे एक बार फिर सेवा का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि उनका हाथियों का परिवार पिछले 46 वर्षों से भगवान महाकाल की शाही सवारी का हिस्सा रहा है। वहीं, कुछ समय पहले श्यामू के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई थी। वन विभाग की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण और ब्लड सैंपल लिया गया था, जिसे जांच के लिए जबलपुर भेजा गया। हालांकि, अब तक उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।







