
हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह श्रावण मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है और पितरों के तर्पण, दान-पुण्य तथा भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान, पितृकर्म और दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस बार हरियाली अमावस्या पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
पं. राकेश झा के अनुसार, पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 11 अगस्त की रात 1:54 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त की रात 11:07 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 12 अगस्त 2026, बुधवार को हरियाली अमावस्या का व्रत और पितृकर्म किया जाएगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र, गौरी योग और गजकेसरी योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। साथ ही चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे, जिससे यह दिन व्रत, पितृ तर्पण, दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना जा रहा है। इस अवसर पर फलदार और छायादार पेड़-पौधे लगाना भी शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या का नाम सावन के हरियाली भरे मौसम के कारण पड़ा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, पितरों का तर्पण और पुण्य कार्य करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और शिव कृपा की प्राप्ति होती है।





