
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में बुधवार तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पवित्र संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, गुरु पूजा की और दान-पुण्य कर पुण्य कमाया।
सुबह-सुबह ही संगम घाट पर भक्तों का सैलाब देखा गया। श्रद्धालु न केवल स्नान करने आए, बल्कि अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विशेष पूजा-अर्चना भी किया।
एक श्रद्धालु ने बताया, “मैं आज सुबह जल्दी उठकर भीड़ बढ़ने से पहले संगम पहुंचा। पवित्र डुबकी लगाने के बाद गुरु की पूजा की, धार्मिक अनुष्ठान किए और दान भी दिया। हमने दुनिया की भलाई और सभी की सलामती के लिए प्रार्थना की।”
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ऐसा चाहिए जो शिष्य से कुछ न ले और शिष्य ऐसा हो जो गुरु को सब कुछ अर्पित कर दे।”
उन्होंने प्रसिद्ध दोहा याद दिलाया —
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
गोपाल गुरु ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु भगवान वेदव्यास, श्रीकृष्ण, भगवान शिव और अपने गुरु की पूजा करते हैं। संगम स्नान के बाद कई भक्त गुरु आश्रमों में जाते हैं, जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं और दान-दक्षिणा देते हैं। इन पुण्य कार्यों से परिवार में सुख-शांति, समाज में सद्भाव और देश की समृद्धि बढ़ती है।
अन्य शहरों में भी उत्साह
अयोध्या में सरयू नदी में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और मंदिरों में दर्शन-पूजन किए। वहीं, महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर पूरे देश में गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का उमंग देखा जा रहा है।




