
दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में सर्वोच्च अदालत ने बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए या गिरफ्तार किए गए उन छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले से जुड़े सभी CCTV फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है।

कोर्ट ने साफ किया कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला नहीं है और प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनके मामले में भी कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अदालत ने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत पर जोर दिया। CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है या निर्दोष लोगों के साथ गलत व्यवहार किया है, तो कानून के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इसके लिए जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होना जरूरी है। CJI ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना किसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पुलिसकर्मियों के घायल होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कुछ पुलिसकर्मियों को चोटों के कारण टांके भी लगे हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि हिंसा के पीछे कौन लोग थे, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं, CJI ने कहा कि अदालत तथ्यों से जुड़े हर सवाल की खुद जांच शुरू नहीं कर सकती। हालांकि, अदालत ने प्रथम दृष्टया स्वतंत्र जांच की जरूरत को स्वीकार किया और कहा कि जांच का स्वरूप और उसकी संरचना बाद में तय की जाएगी।







