
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बुधवार को आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के समर्पण, दृढ़ निश्चय और कड़े परिश्रम की सुखद परिणति है। अनेक सपने संजोए हुए उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया था। आज वे ज्ञान एवं आत्मविश्वास से युक्त होकर वह डिग्री यहाँ से लेकर जा रहे हैं जो उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि विद्यार्थियों को सफलता उनके स्वयं के कड़े परिश्रम से मिलती है, किंतु इस सफलता में उनके माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का भी योगदान होता है। इसलिए, उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे वे रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, उनकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही बहुआयामी प्रगति से प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। तेज़ी से बदलती ऐसी दुनिया में, सीखने का काम सिर्फ़ डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। अपने आप को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप निरंतर ढालते चलने की प्रवृत्ति ही विद्यार्थियों का मजबूत संबल बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे नए विचारों को आजमाने और नवीन ज्ञान अर्जित करने का साहस विकसित करें।
उन्होंने कहा कि सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले युवा हमारे देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। इस तरह वे अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने आचरण में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने से उन्हें बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति से प्रेम केवल ऊंचे नैतिक आदर्श ही नहीं हैं, बल्कि ये समग्र विकास के आधार भी हैं। इन गुणों से उनका जीवन तो बेहतर बनेगा ही, वे समाज व देश के लिए उपयोगी योगदान भी कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की संकल्पना हमारे युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही साकार होगी। वे जीवन में चाहे जिस भी मार्ग को चुनें, उस पर उन्हें पूरी लगन और ईमानदारी के साथ चलते हुए उत्कृष्टता की मंजिल हासिल करनी है।




