
रायपुर : इस साल बस्तर के दो लोगों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है| इसमें दंतेवाड़ा ज़िले की बुधरी ताती और बारसूर के गढ़बोले दंपति शामिल हैं| साल 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों का वितरण नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया | मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में बस्तर के दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया. समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती को यह पुरस्कार प्रदान किया गया.

बुधरी ताती ने सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है. बुधरी ताती दंतेवाड़ा के हीरानगर की रहने वाली हैं. उन्हें महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान एवं समाजसेवा के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है. साल 1984 से बुधरी ताती लगातार वनांचल क्षेत्र में सेवा दे रही हैं. बुधरी ताती ने बस्तर के दूर दराज क्षेत्रों में अब तक 500 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है.

बुधरी ताती का जन्म 15 सितंबर 1966 को हीरानार गांव में हुआ था. बचपन से ही उनमें पढ़ने की लगन और समाज सेवा की भावना थी. पिछले 36 वर्षों से वे नक्सल प्रभावित इलाकों में निरंतर समाज सेवा का कार्य कर रही हैं. उन्होंने पैदल यात्रा करते हुए बस्तर संभाग के लगभग 570 से अधिक गांवों तक पहुंच बनाकर आदिवासी समुदाय को शिक्षा और स्वास्थ्य से जोड़ा. विशेष रूप से महिलाओं को संगठित कर उन्हें प्रशिक्षण दिया और बस्तर में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम की. बुधरी ताती ने सिकल सेल, खून की कमी, पीलिया, सिरदर्द, कमजोर बच्चों और पथरी जैसी बीमारियों को लेकर लोगों को जागरूक किया. उन्होंने जड़ी-बूटियों के माध्यम से न सिर्फ स्वयं उपचार किया, बल्कि ग्रामीणों को भी इलाज के लिए प्रेरित किया.

पद्मश्री मिलने पर बुधरी ताती ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी पहले नहीं थी. अचानक फोन पर बधाइयां आने लगीं. उस समय वे फील्ड में थीं, कभी फोन लग रहा था तो कभी नेटवर्क नहीं मिल रहा था. बाद में उन्हें पता चला कि क्या बात है.उन्होंने कहा मैं शिक्षा के क्षेत्र में काम करती हूं. शिक्षा के माध्यम से 565 बहनों को साक्षर बनाया है. पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्य किए हैं. मैं वर्ष 1984 से इस सेवा कार्य से जुड़ी हूं. भारत सरकार की ओर से कॉल आया था, लेकिन मैं पहले ठीक से समझ नहीं पाई. बाद में बताया गया कि पद्मश्री पुरस्कार के लिए मेरा चयन किया गया है. अब तक मैंने अपने लिए कुछ नहीं किया, जो भी किया समाज के लिए किया. जिस समाज ने मुझे यहां तक पहुंचाया, उसके लिए मैं आभारी हूं.




