
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक स्तर के कई महत्वपूर्ण स्थलों का केंद्र बन चुका है और यह क्षेत्र सतत एवं समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘अष्टलक्ष्मी’ के नाम से पहचाने जाने वाले पूर्वोत्तर के आठ राज्यों ने वैश्विक मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है।
‘अष्टलक्ष्मी’ ने हासिल की वैश्विक पहचान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में निर्मला सीतारमण ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मिलाकर बने ‘अष्टलक्ष्मी’ क्षेत्र ने कई वैश्विक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के पहले 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य से लेकर दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग और सबसे ऊंचे गर्डर रेल पुल जैसी उपलब्धियां पूर्वोत्तर क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाती हैं।
विकास के नए इंजन बन रहे पूर्वोत्तर के राज्य
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को कभी विकास की मुख्यधारा से दूर माना जाता था, लेकिन आज यही राज्य भारत की विकास यात्रा के नए इंजन के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र समृद्धि, शक्ति और अपार संभावनाओं से भरपूर है।
12 वर्षों में विकास परिदृश्य में आया बड़ा बदलाव
एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास परिदृश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। यह बदलाव निरंतर नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के प्रभाव से संभव हुआ है।
कनेक्टिविटी में सुधार से बढ़ी आर्थिक पहुंच
फैक्ट शीट में कहा गया है कि सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने क्षेत्र की भौगोलिक दूरी और अलगाव को काफी हद तक कम किया है। इससे क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिला है और आर्थिक अवसरों तक लोगों की पहुंच मजबूत हुई है।
जीवन स्तर में हुआ उल्लेखनीय सुधार
इस अवधि में स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक लोगों की पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इन बदलावों का सकारात्मक प्रभाव शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
स्वच्छ ऊर्जा और एक्ट ईस्ट नीति का अहम स्तंभ
फैक्ट शीट के अनुसार, पूर्वोत्तर क्षेत्र अब भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। जलविद्युत परियोजनाओं, गैस बुनियादी ढांचे और सीमा-पार कनेक्टिविटी में किए गए निवेश ने इस परिवर्तन को गति दी है।
सतत और समावेशी विकास का मॉडल बना क्षेत्र
फैक्ट शीट में कहा गया है कि इन सभी प्रयासों ने ‘अष्टलक्ष्मी’ को विकसित भारत के भीतर सतत और समावेशी विकास के एक मॉडल के रूप में स्थापित किया है। वर्ष 2014 से लगातार मिल रहे नीतिगत समर्थन के तहत विकास को पर्यावरणीय संवेदनशीलता, संसाधनों के कुशल उपयोग और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ संतुलित किया गया है।
अवसरों और वैश्विक जुड़ाव का नया प्रवेश द्वार
पूर्वोत्तर भारत अब अवसरों और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के नए प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। ‘अष्टलक्ष्मी’ आज एक ऐसे क्षेत्र का प्रतीक बन चुकी है, जो पहले की तुलना में अधिक जुड़ा हुआ, अधिक सशक्त और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार है।




