
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय 15 जून 2026 को गोवा में “पवन ऊर्जा: महत्वाकांक्षा से गतिमान बनाए जाने तक” विषय पर वैश्विक पवन दिवस 2026 सम्मेलन का आयोजन करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की पवन ऊर्जा क्षमता को गति देना और इस क्षेत्र के अगले चरण के विकास की रूपरेखा तैयार करना है।
प्रल्हाद जोशी करेंगे सम्मेलन का नेतृत्व
कार्यक्रम में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मुख्य भूमिका निभाएंगे। उनके साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी, राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, ग्रिड इंडिया, विभिन्न राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा बाजार
भारत वर्तमान में विश्व का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा बाजार है। देश ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट और 2035 तक 155 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन और 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य में पवन ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पवन ऊर्जा विकास के अगले चरण पर रहेगा फोकस
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि पवन ऊर्जा भारत की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति का प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र में रिकॉर्ड 6.1 गीगावाट क्षमता वृद्धि दर्ज की गई है, जो मजबूत नीतियों और उद्योग सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब पवन ऊर्जा विकास के अगले चरण को तेज करने की आवश्यकता है और देश को महत्वाकांक्षा से आगे बढ़कर प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
निर्यात अवसरों और घरेलू विनिर्माण पर होगी चर्चा
सम्मेलन में संसाधन पर्याप्तता, ग्रिड तैयारी, क्षमता वर्धन, घरेलू विनिर्माण प्रतिस्पर्धा, पूर्वानुमान प्रणाली, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वृद्धि और वैश्विक निर्यात अवसरों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इस दौरान कई उद्योग रिपोर्ट और शोध पत्र भी जारी किए जाएंगे, जिनमें वैश्विक बाजारों के लिए भारत के पवन टरबाइन निर्यात को बढ़ावा देने से संबंधित अध्ययन शामिल होंगे।
सरकार, उद्योग और विशेषज्ञों के बीच होगा संवाद
कार्यक्रम में सरकार, नियामकों, परियोजना विकासकर्ताओं, विनिर्माताओं और विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ पूर्ण सत्र और पैनल परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें पवन ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने, घरेलू क्षमता को मजबूत करने और क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मंत्रालय के अनुसार, पवन ऊर्जा क्षेत्र अब विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में वैश्विक पवन दिवस 2026 सम्मेलन भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को गति देने, भविष्य की रणनीति तैयार करने और देश को पवन ऊर्जा विनिर्माण एवं निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।




