
नई दिल्ली। Article 370 Anniversary: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35A हटाए जाने के ऐतिहासिक फैसले को बुधवार (5 अगस्त) को सात साल पूरे हो गए। 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया था।
इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने बेहद गोपनीय रणनीति अपनाई थी। पूरे मिशन की जानकारी केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रखी गई थी। राष्ट्रपति के आदेश के जरिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई और संसद से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित कराया गया।इन 7 अधिकारियों ने निभाई थी अहम भूमिका
1. अजित डोभाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)
फैसले से पहले और बाद में अजित डोभाल श्रीनगर में मौजूद रहे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. बीवीआर सुब्रह्मण्यम (तत्कालीन मुख्य सचिव, जम्मू-कश्मीर)
उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर पूरे अभियान का संचालन किया और स्थानीय प्रशासन तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया।3. राजीव गौबा (तत्कालीन गृह सचिव)
गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने, सुरक्षा व्यवस्था और विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली।
4. के.के. वेणुगोपाल (तत्कालीन अटॉर्नी जनरल)
उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने से जुड़े संवैधानिक पहलुओं की कानूनी समीक्षा और ड्राफ्टिंग में अहम योगदान दिया, जिससे निर्णय कानूनी कसौटी पर मजबूत बना।
5. के. विजय कुमार (तत्कालीन राज्यपाल के सलाहकार)
उन्होंने सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की रणनीति तैयार की और सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की।
6. दिलबाग सिंह (तत्कालीन डीजीपी, जम्मू-कश्मीर)
स्थानीय पुलिस बल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
7. आलोक श्रीवास्तव (तत्कालीन कानून सचिव)
उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और राष्ट्रपति के आदेश से जुड़े दस्तावेजों की कानूनी ड्राफ्टिंग को अंतिम रूप दिया।
सरकार का दावा था कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर के विकास, बेहतर प्रशासन और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं इस निर्णय को लेकर देशभर में व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस भी हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को वैध ठहराया।






