
रायपुर : छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से अफीम की खेती के एक के बाद एक लगातार तीन मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है| उन्होंने अफीम की खेती करने वालों पर कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए है| इसके साथ ही शासन-प्रशासन ने उन इलाकों की चौकसी बढ़ा दी है,जहाँ अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले उजागर हुए है|अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि दुर्ग और बलरामपुर की तर्ज पर कई और जिलों में तथाकथित “अफीम उत्पादक किसानों” की मौजूदगी दर्ज हो सकती है,लिहाज़ा मुख्यमंत्री साय ने सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने इलाकों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। उनके फरमान के बाद आधा दर्जन से ज्यादा जिलों के कलेक्टरों की फौरी कार्यवाही का मामला सामने आया है|

सूत्रों के मुताबिक,दुर्ग,बलरामपुर के अलावा मुंगेली,बिलासपुर,बेमेतरा,धमतरी,महासमुंद और गरियाबंद जिले में प्रशासन का अमला सक्रिय हो गया है| सूत्र इस तथ्य से भी इंकार नहीं करते है,कि कुछ और जिलों से अफीम की अवैध खेती के और मामले सामने आ सकते है| अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि गन्ना उत्पादक कई किसानों के खेत खलियान भी कम संदेहजनक नहीं है, जिस तर्ज पर दुर्ग में मक्के की फ़सल के बीच अफीम की खेती की जा रही थी,उसी तर्ज पर गन्ने की खेती के बीच चोरी छिपे अफीम की खेती का भी अंदेशा जाहिर किया जा रहा है|

हालाँकि अभी दुर्ग और बलरामपुर के अलावा किसी नए जिले और इलाको से अफीम की खेती का मामला सामने नहीं आया है| उधर,मामले के तूल पकडे जाने के बाद हरकत में आई राज्य सरकार ने कलेक्टरों को लपेटे में ले लिया है| खेत-खलियानों के जायजे के लिए कई अफसरों को मैदान में उतार दिया गया है| ये अफसर अब,AC कमरों से बाहर निकल कर मैदानी इलाकों का रुख कर रहे है,ताकि अफीम की अवैध खेती पर रोक लगाई जा सके|

दरअसल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिलों के कलेक्टरों को सर्वे कर 15 दिवस में प्रमाण पत्र सहित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है | मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है, कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि पखवाड़े भर में प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हालाँकि,दुर्ग और बलरामपुर में अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन के किन अफसरों पर जिम्मेदारी तय की गई है,यह अब तक साफ़ नहीं हुआ है| गौरतलब है,कि अफीम की खेती की सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने ही पुलिस को दी थी,इस घटना के उजागर होने पर पुलिस तंत्र की विफलता भी सामने आई है|

मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है। फ़िलहाल,राज्य में अफीम उत्पादक तत्वों समेत अन्य संदेहियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है|




