
बारामती/पुणे : महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाले दल- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भविष्य और उनके परिवार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।भविष्य में एनसीपी बीजेपी के साथ नज़र आएगी या नहीं ? कुछ एक दिनों में तस्वीरों के साफ़ होने की संभावना नजर आ रही है | देश के अधिकतर लोग स्वर्गीय अजित दादा पवार को महाराष्ट्र का छह बार का उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार के भतीजे के तौर पर ही जानते हैं,लेकिन अजित का परिवार और उसका इतिहास काफी पुराना और समृद्ध है। उनके घराने में कई लोग राजनीति,तो कई फिल्मों के निर्माण से जुड़े हैं, जिनमें उनकी चचेरी बहन से लेकर पत्नी और बेटा तक शामिल हैं। न्यूज़ टुडे ने अजित पवार और उनके परिवार के बारे में जो जानकारी इकट्ठा की है,वो गौरतलब है –

इतिहास के जानकार तस्दीक करते है, कि अजित पवार के पूर्वज महाराष्ट्र के सातारा जिले में 18वीं सदी के दौरान उस वक्त सुर्ख़ियों में आए थे,जब सातारा में भयानक सूखा पड़ा था। यहाँ की बड़ी आबादी एक-एक बूंद पानी के लिए के मोहताज थी। जीवनयापन की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों ने सातारा से पलायन कर बारामती में डेरा डाला था। इन लोगो में एनसीपी नेता शरद पवार के पूर्वज भी शामिल बताए जाते थे। पवार के पूर्वज सातारा से पलायन करके बारामती के काटेवाडी पहुंचे और फिर यहीं बस गए। लेकिन सतारा से उनका नाता कभी नहीं टूटा |

पवार परिवार की भूमि कोठी और रियासत कालीन कई ऐतिहासिक धरोहरे आज भी यहां मौजूद है| स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अजित पवार की दादी ने निर्विरोध चुनाव जीत कर अपनी राजनैतिक पैठ कायम की थी|अजित पवार की दादी एक तेज-तर्रार सामाजिक कार्यकर्ता भी थीं। 1952 में एक हादसे ने उनका करियर खत्म कर दिया। वह एक घायल सांड़ की देखरेख कर रही थीं, तभी उसने हमला कर दिया। उनकी कई हड्डियां टूट गईं और बाकी जिंदगी उन्हें बैसाखी के सहारे बितानी पड़ी। बेटे शरद के कांग्रेस में शामिल होने के आठ साल बाद पुणे के अस्पताल में उन्होंने 12 अगस्त 1975 को अंतिम सांस ली थी।

पवार के पूर्वज सातारा के भोंसले (छत्रपति शिवाजी के वंशज) के सैनिकों के रूप में काम करते थे। लेकिन सूखे के कहर के चलते वे रोजी-रोटी के लिए खेत-खलियानो को हरा-भरा करने में जुट गए| पवार के पूर्वजों ने जब बारामती के काटेवाडी और उसके आस-पास के इलाकों में खेती करना शुरू किया तो वो मिसाल बन गई| इस घराने ने सैकड़ों एकड़ बंजर जमीनों को उपजाऊ बना कर गन्ना और कपास की पैदावार की। उनके पूर्वजों ने गन्ने की खेती को कारगर बनाने के लिए शुगर मिल्स की स्थापना कर गन्ना किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया|

शरद पवार के पिता गोविंद राव पवार की छत्र-छाया में अजित पवार के पिता ने कारोबार के गुर सीखे| बताते है,कि गोविंद राव पवार के नेतृत्व में बड़ी तादाद में किसानों ने गन्ने की खेती को अपना लिया था| हालाँकि,वे ज्यादा शिक्षित नहीं थे, लेकिन उनके तेज दिमाग और अच्छी सोच से हर कोई प्रभावित रहता था।उन्हें गांव के प्रधान के रूप में सम्मान प्राप्त होता था| बारामती के गन्ना उत्पादकों को एकजुट कर पवार घराने ने सबसे पहले इस इलाके में एक सहकारी समिति बनाई थी। जब यह कामयाब रही,तो आसपास के अन्य जिलों में भी उनके कदम बढ़ते चले गए | इन इलाकों में पवार घराने का सहकारी गतिविधियों को अस्तित्व में लाने का अभियान जोर शोर से चला|उनके प्रभाव से सहकारी साख समितियां और चीनी सहकारी कारखानों की स्थापना हुई|

गोविंद राव पवार कई सालो तक दर्जनों गन्ना सहकारी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। शरद पवार की मां का नाम शारदाबाई था। वह बच्चों की शिक्षा के लिए काफी जागरुक थीं। वह चाहती थीं कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले। पवार ने अपनी आत्मकथा में मां के बारे में बखूबी जिक्र किया है। उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बताया है। शरद पवार ने लिखा है कि उनकी मां महिलाओं के लिए एक नाइट स्कूल और एक नाइट क्लिनिक भी चलाती थीं। ब्रिटिश शासन के दौरान जिला अधीक्षक ने मेरी मां को बारामती महिला उत्कर्ष समिति में नियुक्त किया था। शारदाबाई पवार परिवार की पहली महिला सदस्य थीं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ा था।

गोविंद राव पवार और शारदाबाई के कुल 11 बच्चे हुए थे। शरद पवार ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मेरी मां 11 बच्चों और पति की देखरेख के अलावा खेतों की भी देखभाल करती थीं। सार्वजनिक जीवन में भी वह उतनी ही सक्रिय थीं। शरद पवार अपने 11 भाई-बहनों में नौवें नंबर पर थे। अजित पवार उनके बड़े भाई अनंतराव के बेटे थे। राकांपा (एसपी) प्रमुख ने अपनी आत्मकथा में इसका जिक्र किया है। लिखा है कि मां शारदा बाई 12 दिसंबर, 1911 को कोल्हापुर के नजदीक एक गरीब किसान परिवार में पैदा हुई थीं। मां-बाप उन्हें पढ़ाना चाहते थे, इसलिए पुणे में लड़कियों के हॉस्टल ‘सेवा सदन’ में रहकर उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की थी। इसी उम्र में माता-पिता नहीं रहे।

बड़ी बहन के पति श्रीपत राव जाधव ने उन्हें पढ़ाया। सातवीं तक पढ़ने के बाद सेवा सदन में ही उन्होंने काम शुरू किया। समाज सुधारक रमाबाई रानाडे ने ये संस्था लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से 1915 में शुरू की थी। 1926 में शारदा की शादी गोविंद राव से हुई थी। शरद पवार की आत्मकथा के मुताबिक,1938 में कांग्रेस के कहने पर शरद पवार की मां और अजित पवार की दादी शारदा बाई ने पुणे लोकल बोर्ड में महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ा। 9 जुलाई 1938 को वह निर्विरोध चुनी गईं। इसके बाद 14 साल तक इसी सीट से जीतती रहीं। उन्होंने पुणे लोकल बोर्ड में पब्लिक हेल्थ, पब्लिक वर्कर्स, बजट, पंचायत कमेटी और स्टैंडिंग कमेटी की जिम्मेदारियां निभाई थीं।

शरद पवार 11 भाई-बहन हैं,इसमें सात भाई और चार बहनें शामिल है। हालांकि, पांच भाई-बहनों की जानकारी ही सार्वजनिक है,अन्य भाई और बहनों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसमें अप्पा साहेब, अनंतराव, शरद पवार, प्रताप और सरोज पाटिल प्रमुख हैं। अप्पा साहेब (निधन हो चुका है), शरद पवार के बड़े भाई अप्पा साहेब का निधन हो चुका है। अनंतराव (निधन हो चुका है) के बेटे है अजित पवार,शरद पवार के दूसरे बड़े भाई अनंतराव का भी निधन हो चुका है।

अजित के पिता बॉम्बे में ‘राजकमल स्टूडियो’ में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम के लिए काम करते थे। अजित की मां का नाम आशा पवार है। नवंबर 2023 में आशा पवार ने अपने बेटे अजित के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था, ‘एक मां होने के नाते, मुझे लगता है कि मेरा बेटा मुख्यमंत्री बनना चाहिए। मैं वर्तमान में 84 वर्ष की हूं, और अन्य लोगों की तरह, मैं भी अपने जीवनकाल में अजीत पवार को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती हूं। अनंतराव और आशा पवार के तीन बच्चों का नाम- श्रीनिवास, अजित पवार और विजया पाटिल है। अजित महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले चाचा शरद पवार से अलग होकर खुद राकांपा प्रमुख बने और चुनाव आयोग ने भी उन्हें पार्टी और चुनाव चिह्न स्वीकृत किया था। राकांपा के नेता अजित महाराष्ट्र विधानसभा पिछली महायुति समेत कई सरकारों में डिप्टी सीएम रह चुके हैं। उनकी शादी सुनेत्रा पवार से हुई जो महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और दबंग छवि वाले पद्मसिंह बाजीराव पाटिल की बहन हैं।

सुनेत्रा ने 2024 में अपनी ननद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सुनेत्रा को महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद बनाया। अजित और सुनेत्रा के दो बच्चे हैं। पार्थ और जय। पार्थ 2019 में महाराष्ट्र के मवाला से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, पार्थ पवार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार के रुख के विपरीत, तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख को पत्र लिखकर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच का अनुरोध किया था। अजित के छोटे बेटे का नाम जय पवार है, जो फिलहाल राजनीति में नहीं हैं। जय उद्यमिता के क्षेत्र में अपना करियर बना रहे हैं। अजित के बड़े भाई श्रीनिवास एग्रीकल्चर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कारोबार कर रहे हैं। बहन विजया पाटिल मीडिया के क्षेत्र में काम कर रहीं हैं।

उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह पुणे जिले में एक विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुर्घटना में अजित पवार के साथ-साथ पांच लोगों की जान गई। इस घटना के बाद महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर है। उनके अंतिम संस्कार की तैयारियाँ शुरू कर दी गई है | बारामती में आम लोगों से लेकर ख़ास लोगो का जमावड़ा लगा हुआ है| कहा जा रही है,कि अंतिम दर्शन के लिए अजित दादा का शव पार्टी दफ़्तर में रखा जाएगा और गुरूवार शाम उनका अंतिम संस्कार होगा|




