
रायपुर /बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में आज एक महत्त्वपूर्ण मामले की सुनवाई है,मामला PMGSY के दागी अफसरों पर बरस रही
मंत्री विजय शर्मा की कृपा और उनकी कार्यप्रणाली से जुड़ा बताया जाता है| इसमें विभागीय भ्रष्टाचार की कई ऐसी परते है, जिसमे बीजेपी सरकार का दोहरा मापदंड सामने आया है| बिलासपुर हाई कोर्ट में मंत्री विजय शर्मा के विभाग से जुड़े विवाद को लेकर गहमा-गहमी देखी जा रही है,दोनों ही पक्षों के वकीलों की सक्रियता गौरतलब बताई जाती है |

छत्तीसगढ़ में बीजेपी का सुशासन और सरकार के मंत्रियों के सुशासन में ज़मीन-आसमान का फ़र्क सुर्ख़ियों में है|अपने हितों के मद्देनज़र सुशासन की नई परिभाषा गढ़ने के मामले में मंत्री विजय शर्मा का नाम अव्वल नंबर पर बताया जाता है |जनहित और लोक कल्याण के बजाए सरकार के मंत्री सुशासन की परिभाषा और मकसद में फेर-बदल कर उसे अपने हितों के अनुरूप ढाल कर “कथनी और करनी” का नया पैग़ाम दे रहे है | इससे जुड़े एक महत्त्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई आज नियत है | भ्रष्टाचार और कमीशनख़ोरी के एक मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW ) ने FIR तो दर्ज कर ली थी,लेकिन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पिछले 17 महीने से चालान की अनुमति और विवेचना का मामला धूल खा रहा है,विभागीय मंत्री विजय शर्मा ने दागी अफसर के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही के लिए कोई रूचि नहीं दिखाई |

मंत्री जी का सुशासन और सरकार के सुशासन की बानगी भी कम दिलचस्प नहीं बताई जाती,दरअसल,अनियमितता उजागर होने के बाद,जिस आरोपी अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी,विभाग ने उसी ENC केके कटारे को,बतौर जाँच अधिकारी खुद के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया ? ऐसे में दागी अफसर अपने ही खिलाफ विवेचना की अनुमति कैसे दे सकता है ? इसे लेकर मामला पेचीदा हो गया है | तस्दीक की जा रही है,कि ENC के साथ “मधुर संबंधों” के चलते विभागीय मंत्री विजय शर्मा ने किसी भी तरह की वैधानिक कार्यवाही से अपना पल्ला झाड़ लिया था | नतीजतन,शिकायतकर्ताओं को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी है |

जानकारी के मुताबिक,फर्जी जाति प्रमाण पत्र में फंसे पीएमजीएसवाय के मुख्य अभियंता केके कटारे के खिलाफ वर्ष 2018 में एंटी करप्शन ब्यूरो ने आर्थिक अनियमितता को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन,इतने वर्षों बाद भी अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिल पाई है | FIR में केके कटारे पर 4.53 लाख रुपए के गोलमाल के आरोप थे। राज्य के एसीबी चीफ ने 25 अक्टूबर 2024 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आरोपी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। लेकिन 17 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है,इसके बावजूद भी आज तक अभियोजन स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है।

सूत्र तस्दीक करते है,कि इस अवधि के दौरान भी कई बार एसीबी की तरफ से विभाग के साथ पत्राचार किया गया था,लेकिन फिर भी विभाग ने एजेंसी को कोई जवाब नहीं सौंपा है। जानकारों के मुताबिक,वर्ष 2018 में दर्ज हुई FIR को 8 साल बीत गए | बीजेपी के सत्ता में आने के बाद सुशासन की हलचल जैसे ही तेज़ हुई हरकत में आई ACB ने अभियोजन अनुमति के लिए अपनी कार्यवाही शुरू कर दी थी,लेकिन उसका इंतज़ार अब तक खत्म नहीं हुआ है, अब मामला अदालत की चौखट पर जा पहुंचा है |

इस मामले ने विधानसभा में भी उस वक्त सत्ताधारी बीजेपी सरकार के मंत्री शर्मा के ख़ेमे में बेचैनी पैदा कर दी थी,जब 2025 के शीतकालीन सत्र में मामला सदन के संज्ञान में लाया गया था | एक विधायक के इस एफआईआर की वस्तुस्थिति और कार्यवाही पर किए गए सवाल के जवाब में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से चौंकाने वाला जवाब दिया गया था | इस संबंध में बताया गया,कि प्रमुख अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा से अभियोजन स्वीकृति के संबंध में अभिमत चाहा गया है। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इस पद पर स्वयं केके कटारे पदस्थ थे। ऐसे में अपने खिलाफ ही “जांच की स्वीकृति” कोई अधिकारी कैसे देगा ? यह भी तस्दीक की जाती है,कि ENC कटारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत लोक आयोग में लंबित है।

मामले की तह तक जाने पर यह तथ्य भी सामने आया है,कि राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एसीबी) ने एफआईआर में दर्ज किया है,कि ग्राम अमरूवा-रिकोकला पार्ट-1 और 2 में बाढ़ आपदा बचाव योजना के लिए 18 लाख की स्वीकृति दी गई थी। इस दौरान 3639 मीटर लंबाई का कार्य कराया गया था। इस कार्य के लिए ठेकेदार को 8 लाख 28 हजार रुपए का भुगतान किया गया था। यह भी बताया जाता है,कि शिकायत के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर ने भी जांच कराई थी | इसमें पाया गया, कि संबंधित कार्य के लिए 3.75 लाख रुपए ही खर्च किए गए थे। जबकि,4.53 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान ठेकेदार को किया गया था। अनियमितता के इस प्रकरण में शासन ने तत्कालीन कार्यपालन अभियंता केके कटारे और हरिओम शर्मा को दोषी पाया था।

प्रधान मंत्री सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) में मुख्य अभियंता कटारे के खिलाफ ईओडब्ल्यू और एसीबी में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की एक अन्य शिकायत भी दर्ज बताई जाती है। इसमें उल्लेख किया गया है कि कटारे के पास लगभग 2,000 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति और शेयर मार्केट में बड़ा निवेश किया गया है।

शिकायत में कहा गया है,कि केके कटारे ने कोरोना संकट के दौरान कागजों में प्रशिक्षण कराकर शासन से लाखों रुपये ऐंठ लिए थे | शिकायत में कीमती जमीनों, आलीशान मकानों, शेयर बाजार में करोड़ों के निवेश और बेनामी संपत्तियों का विवरण शामिल बताया जाता है। बता दें, कि कटारे का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया है।
फ़िलहाल,डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सुशासन की परिभाषा की विवेचना जारी है,जबकि बीजेपी सरकार के सुशासन के मामले की सुनवाई को लेकर अदालत का गलियारा गरमाया हुआ है |





