हरियाणा: महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में महिला सफाई कर्मियों से माहवारी का सबूत मांगे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि यह घटना महिलाओं के प्रति गलत मानसिकता को दिखाती है। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई जगहों पर पीरियड्स में काम से छुट्टी दी जाती है, लेकिन यहाँ तो उल्टा सबूत तक मांगा गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की अनुपस्थिति में किसी और को जिम्मेदारी दी जा सकती थी।

यह मामला 26 अक्टूबर 2025 का है, जब हरियाणा के गवर्नर के दौरे की तैयारियों के दौरान तीन महिला सफाई कर्मियों को अस्वस्थ होने के बावजूद जबरन काम करवाने का आरोप लगा। महिलाओं ने बताया कि सुपरवाइजर ने उनसे माहवारी होने के सबूत में निजी अंगों की तस्वीरें दिखाने को कहा और मना करने पर अभद्रता की गई और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। जानकारी के अनुसार, शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया है। पुलिस ने भी यौन उत्पीड़न के आरोप में तीन लोगों पर मामला दर्ज किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई, कि यह याचिका महिलाओं की गरिमा की रक्षा में सकारात्मक बदलाव लाएगी।
