
संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह भी विपक्षी हंगामे के साथ शुरू हुआ। सोमवार को संसद के दोनों सदनों राज्यसभा व लोकसभा में हंगामा हुआ जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने NEET प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ। विपक्ष की ओर से नियम 267 के तहत तुरंत चर्चा की मांग की गई, लेकिन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इसे अस्वीकार कर दिया।
सभापति बनाम खड़गे
खड़गे ने नियम 267 के तहत नोटिस दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि यह विषय “अत्यंत दुर्लभ” परिस्थिति में आता है। इसके जवाब में सभापति ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस पर अपना फैसला सुना दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि यह नियम पूर्व में मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी समेत कई वरिष्ठ नेताओं वाली समिति की सिफारिश पर बनाया गया था। सभापति ने स्पष्ट किया कि “अत्यंत दुर्लभ” स्थिति में भी पूरे सदन की सर्वसम्मति जरूरी है, जो इस मामले में नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे नियमों के अनुसार चलना चाहिए या नियम तोड़ने चाहिए?” विपक्षी सांसदों के लगातार शोर-शराबे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
नियम 267 क्या है?
यह राज्यसभा का विशेष नियम है, जिसमें सदन की अन्य सभी कार्यवाहियों को रोककर सिर्फ उस विषय पर चर्चा की जाती है जिस पर नोटिस दिया गया हो। चर्चा के अंत में वोटिंग का भी प्रावधान है।







