भोपाल के यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से पीथमपुर आया जहरीला कचरा आज सुबह 10 बजे से जलाया जाएगा। हाईकोर्ट के 18 फरवरी के निर्देश के बाद 27 तारीख से पीथमपुर की रामकी फैक्ट्री में रखे रासायनिक कचरे के निष्पादन के ट्रायल रन की तैयारी कल से ही शुरू कर दी गई थी। यहां पर 12 कंटेनर 1 जनवरी को भोपाल से पीथमपुर भेजे गए थे। इनमें विभिन्न प्रकार के अवशिष्ट मौजूद हैं। इसमें नेप्थॉल, सेवीन, रिएक्टर रेसिड्यू, पेस्टिसाइड रेसिड्यू, सेमी प्रोसैस्ड रेसिड्यू एक्सकैवेटेड सॉइल (मिट्टी) वहां की जो थी।
यहां मौजूद कंटेनरों में से पांच कंटेनर में रखे अवशिष्ट को आज स्टोरेज शेड में ले जाया जाएगा, जहां पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन में मिलाया जाएगा। इसके बाद इसे इंसीनेटर में फीड करेंगे। फीड करने के पहले इसे टेंपरेचर में लाने के लिए 12 घंटे तक ब्लैक में चलाएंगे यानी इसमें अवशिष्ट नहीं डालेंगे। वहीं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उनको मास्क, गॉगल्स और हैंड ग्लव्स दिए गए हैं।
10 टन अवशेष जलाने में करीब 72 घंटे का समय लगेगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहां है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा, जिसके तहत काम किया जा रहा है। 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। इसके लिए तीन फीड रेट डिसाइड की गई है। 135 किलोग्राम पर ऑवर, दूसरा 180 किलोग्राम पर ऑवर और तीसरा 270 किलोग्राम पर ऑवर, तीनों की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को भेजी जाएगी।
एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड इंदौर के रीजनल ऑफिसर श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने जो निर्देश दिए थे कि 18 तारीख से यूनियन कार्बाइड का जो अवशिष्ट रखा हुआ है उसका डिस्पोजल शुरू किया जाए। इसके ट्रायल की कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जिसके तहत जो कंटेनर आए थे उसमें जो अवशिष्ट थे।
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5 कंटेनर खोले गए हैं, उसको स्टोरेज शेड में भंडारित किया जाएगा। पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन से मिलाकर इंसीनेटर में फीड किया जाएगा। जब टेंपरेचर 850 हो जाएगा तब उसको फीड करेंगे। इंसीनेटर में प्रोसेस के समय प्राइमरी चेंबर में 850 प्लस माइनस 50 मतलब 800 से 900 के बीच में टेंपरेचर होना चाहिए। शुरू में वेस्ट डालने पर टेंपरेचर कम हो जाता है, जिसे 850 तक ले जाना होगा। सुबह 10 बजे से काम शुरू होगा।
फर्स्ट ट्रायल में तीन दिन कचरा जलाया जाएगा। इस दौरान उसमें मिट्टी निकलेगी। इसके बाद गैस आगे क्लीनिंग सेक्शन में जाएगी जो सेकेंडरी सेक्शन है। वहां टेंपरेचर 1100 से 1200 डिग्री सेंटीग्रेड होता है। वहां भी डीजल डालते हैं। वहां जलने के बाद आगे ब्लू गैस है, वह आगे बढ़ेगी जिसकी क्लीनिंग की प्रक्रिया है, जिसके तहत मल्टी साइक्लोन में जाएगी जहां बड़े पार्टिकल जो हैं वह नीचे चले जाएंगे। गैस आगे बढ़ेगी मल्टी साइक्लोन के पहले स्प्रे ड्रायर है, इससे गैस क्लीनिंग होगी। ड्राई स्क्रबर में वेट फिल्टर फिर वेट स्क्रबर इसके बाद चिमनी में जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया करनी होगी।
इसमें प्राइमरी से ठोस अवशिष्ट की राख निकलेगी, दूसरा मल्टी साइक्लोन से ठोस अपशिष्ट निकलेगा, तीसरा ड्राई स्क्रबर से निकलेगा, चौथा वेट फिल्टर से सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे, लास्ट में वेट स्क्रबर में पानी निकलेगा। जो सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे। उनको स्टेबलाइज करके लैंडफिल में एक अलग सेल बनाकर उसमें डाला जाएगा और उसका डिस्पोजल होगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहा है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा जो 27 तारीख से चल रहा है, 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। पिछला ट्रायल 90 टन पर किया गया था।