
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में NCP नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि विमान हादसे क्यों होते हैं और उनसे एविएशन सुरक्षा को कैसे मजबूत किया गया है। विमान दुर्घटनाएं भले ही बेहद दुखद हों, लेकिन इतिहास गवाह है कि हर बड़ी त्रासदी के बाद उड़ान सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अहम सुधार किए गए।
ग्रैंड कैन्यन हादसा: निगरानी सिस्टम की शुरुआत
30 जून 1956 को ग्रैंड कैन्यन के ऊपर दो यात्री विमान आपस में टकरा गए। उस समय जमीन से विमानों की निगरानी की तकनीक बेहद कमजोर थी। इस हादसे के बाद अमेरिका में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की स्थापना हुई और रडार सिस्टम को आधुनिक बनाया गया। आज विमानों में टक्कर से बचाव के लिए TCAS सिस्टम लगा होता है।
यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 173: टीमवर्क का सबक
28 दिसंबर 1978 को एक विमान का ईंधन खत्म हो गया क्योंकि पायलट एक छोटी तकनीकी समस्या में उलझा रहा और क्रू की चेतावनी को नजरअंदाज करता रहा। इसके बाद कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट (CRM) शुरू किया गया, जिससे पायलट और क्रू मिलकर फैसले लेने लगे।
एयर कनाडा फ्लाइट 797: आग से सुरक्षा
1983 में विमान के टॉयलेट में लगी आग ने यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं दिया। इसके बाद विमानों में स्मोक डिटेक्टर, ऑटोमैटिक फायर सिस्टम और फर्श पर चमकने वाली मार्गदर्शक पट्टियां अनिवार्य की गईं।







