
नई दिल्ली। भारतीय रक्षा क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में रूस से पांच और S-400 लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। गौरतलब है कि यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की घातक मारक क्षमता देखने के बाद लिया गया है।
S-400 मिसाइल: रूस के साथ 2018 में हुए शुरुआती सौदे के बाद अब 5 और सिस्टम आएंगे।
धनुष गन सिस्टम: यह आर्टिलरी गन दुर्गम इलाकों में लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
रिमोट स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: बिना पायलट वाले ये घातक जेट भविष्य के युद्धों की दिशा बदल देंगे।एंटी-टैंक गोला-बारूद: बख्तरबंद दुश्मनों को पल भर में राख करने वाली आर्मर्ड पियर्सिंग तकनीक।
DRDO का मानवरहित मास्टरप्लान
मैदानी सूत्रों ने बताया है कि भारतीय वायुसेना के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और रिमोट से चलने वाले स्ट्राइक एयरक्राफ्ट की खरीद भी इस सौदे का हिस्सा है। दरअसल, यह मानवरहित जेट DRDO का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। हालांकि, इसे पूरी तरह हकीकत बनने में अभी 7 से 8 साल का वक्त लग सकता है, लेकिन इसकी मंजूरी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव मजबूत कर दी है।कोस्ट गार्ड और थल सेना भी होगी अभेद्य
DAC ने थल सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम और कोस्ट गार्ड के लिए भी आधुनिक उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक रनवे पर निर्भर न रहने वाला हवाई निगरानी सिस्टम हमारी सेना की टुकड़ियों को कहीं भी, कभी भी निगरानी की ताकत देगा, जबकि हाई कैपेसिटी रेडियो रिले फेल-प्रूफ संचार सुनिश्चित करेगा।
क्या है DAC और क्यों है यह फैसला अहम?
बता दें कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) रक्षा मंत्रालय की सबसे बड़ी संस्था है जो हथियारों की खरीद पर अंतिम फैसला लेती है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए इस बार ज्यादातर स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों पर जोर दिया गया है, जो चीन और पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर भारत की स्थिति को अभेद्य बना देगा।




