
रायपुर : सीबीआई ने सीजीपीएससी फर्जीवाड़ा में फाइनल चार्जशीट पेश कर नए आरोपियों के नाम और काम उजागर कर दिए है। लेकिन इस चार्जशीट में साफ़ नहीं है, कि किस शीर्ष स्तर से CGPSC घोटाले को अंजाम दिया था, सीबीआई की अब तक की जाँच में ऐसे कोई तथ्य भी सामने नहीं आये है, जिससे पता चलता हो, कि CGPSC के तत्कालीन चैयरमेन टामन सिंह सोनवानी के सिर पर आख़िर किसका “हाथ” था ? पिछले दरवाज़े से सोनवानी ने क्या इस शख्स की कृपा से ही लम्बे समय तक घोटालो को अंजाम दिया था।

दरअसल,CGPSC के आरोपी टामन सिंह सोनवानी की चैयरमेन पद पर नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-पे बघेल ने विशेष परिस्थियों में की थी। जबकि, सोनवानी से वरिष्ठ और कार्यकुशल अधिकारियों ने भी चैयरमेन पद पर नियुक्ति के लिए अपने “हाथ-पांव” मारे थे। बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद CGPSC घोटालें की जाँच सीबीआई को सौंपी गई थी।

एजेंसी ने आरोपियों की धर-पकड़ करने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी थी। इस बीच सीबीआई की फ़ाइनल चार्जशीट सामने आई है। इसमें कही भी साफ़ नहीं हो रहा है, कि फर्जीवाड़े के लिए CGPSC को सरकारी समर्थन आख़िर कहाँ से प्रदान हो रहा था ? इस घोटालेबाज़ी में तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-पे बघेल की भूमिका आख़िर क्या थी ?

सीबीआई की फ़ाइनल चार्जशीट सुर्ख़ियों में है, इसमें कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जबकि एक कोचिंग संचालक को भी आरोपी बनाया गया है। हालाँकि उसे अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

बताया जाता है, कि एजेंसी ने कोचिंग संचालक का केवल बयान लेकर छोड़ दिया है। चार्जशीट में बताया गया है, कि कोचिंग संचालक ने बारनवापारा के वेंकटेश होटल में ठहराकर घोटाले में शामिल कथित 29 अभ्यर्थियों को पीएससी परीक्षा की तैयारी कराई थी। सीजीपीएससी की इस विशेष कोचिंग संचालक के पास सीजीपीएससी का पर्चा पहले से ही मौजूद था।

राज्य में सीजीपीएससी की घोटाले की गूंज 2020 से 2022 के बीच जोरों पर थी। इस दौरान राजनैतिक और भाई-भतीजावाद से प्रेरित कई अभ्यर्थियों को पिछले दरवाजे से उच्च पदों पर नियुक्ति दे दी गई थी। सरकारी सेवाओं की भर्ती प्रक्रियाओं में आरोप है, कि पीएससी परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले उम्मीदवारों का उच्च पदों पर चयन किया गया था।फ़िलहाल, सीबीआई की फाइनल चार्जशीट ख़ूब सुर्खियां बटोर रही है।






