
रायपुर : डॉ.दंपति ने आखिर नवजात लड़का किसे सौंपा था ? कौन रसूखदार है,जिसे लड़की के बजाए लड़का भेंट में दिया गया था ? क्या नवजात लड़के की खरीद-फ़रोख़्त की गई थी|IVF सेंटर में बच्चों की अदला-बदली की पुख़्ता रोकथाम का कोई ठोस बंदोबस्त किया भी गया है ? या नहीं,इसे लेकर सवाल उठ रहे है|

सूत्रों के मुताबिक,डॉ. पहलाजानी दंपति की इस पूरे कारोबार में संलिप्तता को लेकर गहमागहमी देखी जा रही है|रायपुर के पहलाजानी नर्सिंग होम विवाद में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब पीड़ित की गुहार पर संज्ञान लेते हुए,सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे|चर्चित नर्सिंग होम में अंजाम दिया गया IVF–सरोगेसी केस अब छत्तीसगढ़ पुलिस और अदालत के लिए मेडिकल साइंस के उपयोग- दुरूपयोग से जुड़े अपराधों की नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है|

देश-प्रदेश के अस्पतालों में “मेडिकल मर्डर” की कई वारदाते सामने आ चुकी है, जिसमें डॉक्टरों ने कई चर्चित मरीजों को मौत के घाट उतार दिया था|ऐसे कई मामलों की बानगी अदालत में कानूनी दांव-पेचों के आधार पर सुर्खियां बटोर रही है|लेकिन छत्तीसगढ़ में IVF–सरोगेसी से उत्पन्न बच्चों को लेकर डॉक्टर पहलाजानी दम्पति की दलीलें सुर्ख़ियों ने है|ऐसी दलीलें ना सुप्रीम कोर्ट के गले उतर रही है,और ना ही उन विशषज्ञों के, जो सालों से IVF–सरोगेसी के जरिये जरूरतमंदों की सूनी गोद भर रहे है|

गंभीर तथ्य यह है,कि डॉक्टर दम्पति IVF–सरोगेसी एक्ट के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर रहे है ,जरुरत है ऐसे संस्थान पर फ़ौरन तालाबंदी की|दरअसल,सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 24(ग) के तहत एक ही उपचार चक्र में अलग-अलग पुरुषों या महिलाओं से प्राप्त युग्मकों/भ्रूणों के उपयोग पर स्पष्ट रोक है | लेकिन अवैध कारोबार के लिए डॉक्टर दम्पति कायदे-कानूनों का भी सौदा कर रहे थे |

पीड़ितों ने उनकी फ़ौरन गिरफ़्तारी की मांग की है| हालांकि,इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने इस चर्चित प्रकरण को लेकर रायपुर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए है| देखना, गौरतलब होगा, कि आख़िर किन धाराओं के तहत पुलिस एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना करती है| इस बीच,रायपुर स्थित माता लक्ष्मी नर्सिंग होम एवं पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर से जुड़ा नवजात बच्चों की अदला-बदली का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। यह विवाद छत्तीसगढ़ पुलिस ही नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बताया जाता है।

चर्चा सरगर्म है,कि नवजात बच्चों की अफ़रा-तफरी के आरोप डॉक्टर पहलाजानी दम्पति पर पहली बार नहीं लगे, बल्कि इसके पूर्व भी कई परिवार ऐसे ही प्रकरणों से पीड़ित बताए जाते है|अलबत्ता यह पहला मौका बताया जा रहा है,जब किसी पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस से लेकर अदालत तक का दरवाजा खटखटाया था|पीड़ित ने हाई कोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद उम्मीद नहीं छोड़ी बल्कि न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर, माता लक्ष्मी नर्सिंग होम एवं पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर की असलियत सामने लाने का बीड़ा उठाया था|

क्या है पूरा मामला ?
अपीलकर्ता दंपति ने दावा किया है कि उन्होंने 25 दिसंबर 2023 को इस आईवीएफ सेंटर में जुड़वां बच्चों एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था। यह डिलीवरी पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर,में कार्यरत कर्मियों के देख-रेख में कराई गई थी| पीड़ित परिवार के सदस्यों ने जुड़वा बच्चों के जन्म के दौरान एक लड़की और जबकि दूसरे के लड़का होने की ख़ुशी को बतौर प्रत्यक्षदर्शी देखा था| यही नहीं, स्टाफ ने भी बधाइयां दे कर इसकी पुष्टि की थी| जन्म के दौरान लेबर रूम में कई घंटों तक स्थिति सामान्य थी,लेकिन अचानक डॉ दंपति के रुख में बदलाव देखा गया था| दंपति का आरोप है कि आईवीएफ केंद्र में उनके नवजात बेटे को एक लड़की से बदल दिया गया और दोनों लड़कियाँ सौंप दी गई |

उनके मुताबिक,अस्पताल से चलता करने के बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी| इस दौरान डीएनए प्रोफाइलिंग रिपोर्ट ने असलियत जाहिर कर दी और डॉ दम्पति के दावों को संदिग्ध बना दिया था| दरअसल, डीएनए रिपोर्ट में सामने आया था, कि जुड़वां बच्चों में से एक बच्चे का “जीन पूल” माता-पिता में से किसी से भी मेल नहीं खाता। इसके बाद पीड़ित दंपति ने डॉ दम्पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने असलियत पर से पर्दा डालने के लिए मेडिकल बोर्ड के जरिए मामले को रफ़ा-दफा करने की साजिश रची थी|

डॉक्टर दम्पति के पक्ष से पैतरेबाजी का नया विवाद
जानकारी के मुताबिक,आईवीएफ सेंटर की ओर से अदालत में दायर हलफनामे में दावा किया गया कि डीएनए में अंतर आईवीएफ प्रक्रिया की वजह से संभव है, क्योंकि,तीन भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए थे,अंडाणु बाहरी दाता से लिया गया था,शुक्राणु अपीलकर्ता के पति और एक बाहरी दाता से प्राप्त किए गए थे|उसने यह भी दावा किया कि यह सब अपीलकर्ताओं की सहमति से हुआ था|तस्दीक की जाती है, कि कई आईवीएफ सेंटर जरूरतमंद मरीजों से कानूनी और इलाज से जुड़े दस्तावेजों पर इलाज़ शुरू होते ही हस्ताक्षर करवा लेते है|पीड़ित परिवार को यही प्रक्रिया के दौर से गुजरना पड़ा था| अदालत में यह भी साफ़ हुआ,कि अपने बचाव में डॉक्टर दम्पति कई झूठे दांवे कर रहे थे|

अपीलकर्ताओं के वकील ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बाहरी दाता के शुक्राणु के उपयोग की कोई सहमति नहीं दी गई थी| यही नहीं, सहमति पत्र में हेराफेरी की गई,सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 24(ग) के तहत एक ही उपचार चक्र में अलग-अलग पुरुषों या महिलाओं से प्राप्त युग्मकों/भ्रूणों के उपयोग पर स्पष्ट रोक है | पीड़ित पक्षकार की ओर से अदालत में वकील ने कानूनी आधार पर दांव किया,कि यदि तीन भ्रूण अलग-अलग स्रोतों से प्रत्यारोपित किए गए, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन है और प्रथम दृष्टया एफआईआर दर्ज कर जांच जरूरी है|

उन्होंने यह दलील,कि अधिनियम 42/2021 के प्रावधानों पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया और सहमति की सत्यता पर उठे सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया था| दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना, कि भ्रूण प्रत्यारोपण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था मौजूद है,ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालतों की शक्तियां सीमित नहीं की जा सकतीं|

बहरहाल,डॉक्टर दम्पति की कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल सिर्फ एक नहीं बल्कि कई है,नवजात लड़का आखिर गया कहां ? क्या सहमति पत्र फर्जी है ? क्या IVF सेंटर ने कानून तोड़ा ? इस पूरे मामले पर अब राज्य मेडिकल जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।
रायपुर के डॉ पहलाजानी दंपति ने जुड़वा बच्चों में “लड़का” आख़िर किसके किया हवाले,दोनों लड़कियों में “एक” किसकी ? इस टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह तक ?






