दिल्ली वेब डेस्क /
सुप्रीम कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका को भाजपा नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी। बता दें कि अश्विनी उपाध्याय पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर साल 2018 में प्रजेंटेशन भी दे चुके हैं। वहा उन्होंने वेंकटचलैया आयोग का भी उल्लेख किया था।
बीजेपी नेता और वकील अश्वनी उपाध्यय ने अपनी याचिका में कहा है कि जनसंख्या विस्फोट, बम विस्फोट से अधिक खतरनाक है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में देश मे 125 करोड़ आधार कार्ड बने हुए है। करीब 25 करोड़ की आबादी बिना आधार की है। इनके अलावा 5 करोड़ की आबादी घुसपैठियों की है। इस तरह हमारे देश की आबादी 150 करोड़ पहुंच गई है और हम चीन को पीछे छोड़ चुके हैं। जबकि हमारे पास कृषि योग्य भूमि मात्र 2% और पीने योग्य पानी मात्र 4% है।
उपाध्याय ने कहा कि देश में कई नए कानून बनाए गए, लेकिन देश के लिए सबसे ज्यादा जरुरी जनसंख्या नियंत्रण कानून है, जो कि नहीं बनाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि हम दो – हमारे दो, कानून के जरिए देश की करीब 50 फीसदी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
याचिकाकर्ता ने पिछले साल अगस्त में सरकार को रिप्रजेंटेशन दिया था जिसमें कई तर्क दिए गए। उन्होंने कहा था कि अटल बिहारी वायपेयी सरकार में 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग ने दो साल की कड़ी मेहनत के बाद संविधान के अनुच्छेद 47 A जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था। इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत बताई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट खारिज कर चुका है याचिका
सितंबर 2019 में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दायर याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि हम सरकार के कार्यों को अंजाम नहीं दे सकते। जनसंख्या नियंत्रण कानून पर अमल करवाना अदालत का कार्यक्षेत्र नहीं न्यायमूर्ति डीएन पटेल और सी हरी शंकर की पीठ ने कहा था कि इस याचिका पर सुनवाई करने करने का कोई वजह नहीं है, इसलिए इस याचिका को खारिज किया जाता है। न्यायपालिका सरकार के कार्यों को नहीं कर सकती है और अदालत संसद और राज्य विधानसभाओं को निर्देश जारी नहीं करना चाहती है।