
नई दिल्ली : भारत का 77वां गणतंत्र दिवस सिर्फ सैन्य परेड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कूटनीति और वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी ऐतिहासिक बनने जा रहा है। इस बार गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में भारत पहुंचे हैं|सूत्रों के मुताबिक,परेड के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चर्चा में रहे मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अंतिम हस्ताक्षर हो सकते हैं। यही वजह है कि यूरोप के दर्जनभर शीर्ष अधिकारी भी इस यात्रा का हिस्सा बने हैं।

आखिर कौन हैं उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जिन्हें दुनिया की ‘आयरन लेडी’ कहा जाता है?
उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय संघ की कार्यकारी संस्था यूरोपीय आयोग की मौजूदा अध्यक्ष हैं। यह पद 27 यूरोपीय देशों का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक मंच पर यूरोप की संयुक्त आवाज माना जाता है। उन्होंने 2019 में पहली बार यह पद संभाला और 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वह इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला भी हैं। उर्सुला को जर्मनी की सत्तारूढ़ पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) का समर्थन प्राप्त रहा है। जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार में वे रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं।

ब्रसेल्स में जन्म, राजनीति का माहौल विरासत में
उर्सुला का जन्म 8 अक्टूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ। उनके पिता अर्न्स्ट आलरेक यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारी थे और बाद में जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के मुख्यमंत्री बने। राजनीति और कूटनीति उनके जीवन का हिस्सा बचपन से ही रही। उनकी मां हाइडी-एडेल एक शिक्षाविद् थीं, जिन्होंने पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उर्सुला बचपन से ही जर्मन और फ्रेंच भाषा में निपुण रहीं। 13 साल की उम्र में उनका परिवार जर्मनी लौटा, जहां उनका झुकाव घुड़सवारी और शास्त्रीय संगीत की ओर बढ़ा।

उर्सुला ने यूरोपियन स्कूल, गोटिंगेन यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा हासिल की। लंदन में पढ़ाई के दौरान सुरक्षा कारणों से उन्हें छद्म नाम से रहना पड़ा। बाद में उन्होंने अपना करियर बदला और मेडिसिन को चुना। हैनोवर मेडिकल स्कूल से पढ़ाई कर वे एक प्रशिक्षित डॉक्टर बनीं और महिला क्लिनिक में काम किया।मेडिकल पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात हाइको वॉन डेर लेयेन से हुई, जिनसे उन्होंने 1986 में विवाह किया। रिसर्च के सिलसिले में दोनों अमेरिका गए, जहां उर्सुला ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया और वैश्विक राजनीति को नजदीक से समझा।

40 की उम्र के बाद राजनीति में एंट्री-
उर्सुला ने राजनीति में अपेक्षाकृत देर से, 40 के दशक में कदम रखा। 1990 में उन्होंने CDU जॉइन की, लेकिन असली पहचान 2003 में बनी, जब वे लोअर सैक्सनी की सामाजिक मंत्री बनीं।इसके बाद वे एंजेला मर्केल की सरकार में श्रम मंत्री, परिवार मंत्री और रक्षा मंत्री रहीं।परिवार नीति में सुधार, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और सेना के आधुनिकीकरण जैसे फैसलों के लिए वे जानी जाती हैं।रक्षा मंत्री रहते हुए उन पर बाहरी सलाहकारों को दिए गए ठेकों में अनियमितताओं के आरोप लगे। इस मामले में संसदीय जांच भी हुई, हालांकि उनकी राजनीतिक हैसियत पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा।उर्सुला को एक बेहद अनुशासित और काम के प्रति समर्पित नेता माना जाता है। कहा जाता है कि वे ब्रसेल्स में अपने ऑफिस से सटे स्टूडियो में ही रहती हैं ताकि काम में कोई बाधा न आए। उनकी सख्त निर्णय क्षमता के चलते मीडिया उन्हें ‘यूरोप की आयरन लेडी’ कहता है।




