
रायपुर : छत्तीसगढ़ में ध्वस्त हो चुकी,पुलिस व्यवस्था को कारगर बनाने के लिए रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई है| लेकिन,शुरुआती दौर से ही यह सिस्टम राज्य की बीजेपी सरकार के अरमानों पर पानी फेर रहा है| छत्तीसगढ़ शासन ने रायपुर के जिन इलाकों को चिन्हित कर कमिश्नर प्रणाली के अधिकार के क्षेत्र में शामिल किया है,उनमें से ज़्यादातर इलाकों में अपराधों में ना केवल तेज़ी आई है,बल्कि आम शिकायकर्ताओं से कार्यवाही के नाम पर अवैध वसूली का ग्राफ भी तेज़ी से ऊपर चढ़ रहा है| कई थानों के इर्द-गिर्द रेत और विभिन्न खनिजों से लदे वाहनों की लंबी कतारे साफ़ कर रही है,कि जाँच-पड़ताल के नाम पर आख़िर चल क्या रहा है ? पीड़ितों की माने तो अब FIR दर्ज़ कराना तक दूभर हो गया है|

ताज़ा मामला,उस एयर होस्टेस दंपति की शर्मनाक वारदातों से जुड़ा है,जिसके ठिकाने पर अनुसूचित जाति वर्ग की एक नाबालिग युवती को घर के दैनिक कामकाज़ के लिए नौकरी पर रखा गया था| परिजनों की माने तो, इस युवती के साथ अमानवीय घटनाएं आम हो चुकी थी | पीड़ित युवती तस्दीक करती है,कि एयर होस्टेस का पति उस पर बुरी नजर रखता था,उसे मारा-पीटा जाता था,कई बार हैवानो की असहनीय यातनाओं का सामना करते-करते वो बेसुध तक हो जाती थी |शिकायत के मुताबिक, यह भी तस्दीक की जाती है,कि शोषण की हदे पार होने पर पीड़ित युवती ने अपनी आपबीती परिजनों को सुनाई थी ?

मामले के सामने आने के बाद पीड़ित को अपने साथ लेकर परिजन स्थानीय पुराने विधानसभा थाने भी पहुंचे थे | उन्होंने पुलिस को आपबीती सुनाई और बाकायदा लिखित शिकायत कर वैधानिक कार्यवाही की मांग की| उधर,मामले के संज्ञान में आते ही पुलिस ने विवेचना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर शिकायतकर्ता को ही थाने से चलता कर दिया,अलबत्ता एयर होस्टेस दम्पति की हाँ में हाँ मिलाकर पीड़ित परिवार पर शिकायत वापसी का दबाव बनाने में जुट गए ? पीड़ितों की माने तो विवेचना कर FIR दर्ज करने के बजाए कतिपय पुलिस अधिकारियों ने एयर होस्टेस दम्पति से सीधा संपर्क साधा और पीड़ित परिवार को ही डराने-धमकाने में जुट गए| उनकी माने तो,पुलिस अधिकारी ने थाने में ही पीड़ित बच्ची के साथ मारपीट की,उसे डराया-धमकाया और झूठे केस में फंसा कर परिवार को ही जेल भेजने की चेतावनी दे दी |

पीड़ित तस्दीक करते है,कि जहां उनकी शिकायत रद्दी की टोकरी में फेंक दी गई है,वही एयर होस्टेस दंपति को पूछताछ के लिए बुलाया तक नहीं गया | उनके मुताबिक,FIR दर्ज करने के बजाए संबंधित पुलिस अधिकारी ने मामले को ही रफा-दफा करने पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी| पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए भटक रहा है| रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की कामयाबी के लिए राज्य की बीजेपी सरकार तेज़ी से संसाधन जुटा रही है |

पुलिस कमिश्नर भी पारदर्शितापूर्ण कार्यप्रणाली के लिए जहां पुलिस अधिकारियों को हिदायते दे रहे है,ग्राउंड ज़ीरो में उतर कर हालात का जायजा ले रहे है,वही कई ऐसे भी अधिकारी है,जो वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर सिस्टम को लाभ के धंधे में तब्दील करने में पीछे नहीं है,उनकी उगाही जोरों पर बताई जाती है| जानकारों के मुताबिक,सिस्टम में शामिल ऐसे प्रभावशील अधिकारी अब नए तरीके से मामले की विवेचना कर रहे है,पहले शिकायतकर्ताओं की माली हालत जांची-परखी जा रही है |इसके बाद ही FIR दर्ज करने पर जोर दिया जा रहा है| ऐसे अफसरों की कार्यप्रणाली से पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर सवालियां निशान लगना शुरू हो गया है|

कई इलाकों में चाकूबाज़ी और अन्य अपराधों की गहमा-गहमी के बीच नाबालिग पीड़िता रोमा (15) (बदला हुआ नाम ) की शिकायत सुर्ख़ियों में है, प्रकरण को शोषण से जोड़कर देखा जा रहा है| नाबालिग पीड़िता थाना विधानसभा ग्राम दोंदे खुर्द के आस-पास की निवासी बताई जाती है| उसने शिकायत में बताया है,कि वह आर्थिक तंगी के कारण अक्टूबर-नवंबर 2025 से पिरदा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले कारोबारी वीर शर्मा और उनकी पत्नी भारती शर्मा के घर में झाड़ू-पोछा और खाना बनाने का काम करती थी।

पीड़िता के अनुसार वीर शर्मा फोन कर उसे काम पर आने के लिए दबाव बनाते थे और नहीं आने पर पुलिस से मिलकर केस में फंसाने की धमकी देते थे। शिकायत में बताया गया है, कि 23-24 जनवरी 2026 को आरोपी ने फोन कर घर में रखी एक पॉलिथीन को बिना खोले चावल के डिब्बे में रखने और उसकी फोटो व्हाट्सऐप पर भेजने को कहा था। युवती का कहना है कि उसे इस बात पर संदेह हुआ कि कहीं उसे झूठे मामले में न फंसा दिया जाए। इसके बाद उसने 25 जनवरी से काम पर जाना बंद कर दिया था।

रोमा का कहना है कि इस दौरान आरोपी दंपति छोटी-छोटी बातों पर जातिसूचक गाली-गलौज करते थे और विरोध करने पर झूठे चोरी के मामले में फंसाने की धमकी देते थे। पीड़िता का आरोप है कि 13 फरवरी को दंपति के साथ विधानसभा थाना के पुलिसकर्मी उसके रिश्तेदार के घर पहुंचे और उस पर सोना-चांदी चोरी करने का आरोप लगाते हुए उसे अपने साथ ले गए थे। रास्ते भर पुलिस कर्मियों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई और गाली-गलौज की गई। और एयर होस्टेस के घर पर भी उसे मारा-पीटा गया| शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि थाना ले जाकर पुलिस और आरोपी ने मिलकर तीन लाख रुपये देने का दबाव बनाया, जिसे बाद में दो लाख रुपये कर दिया गया। पैसे नहीं देने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस की धमकी से डरकर रिश्तेदारों ने कर्ज लेकर पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये आरोपी को दे दिए। यह लेन-देन पास की किराना दुकान के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा भी किया गया है।शिकायत में कहा गया है कि पुलिस ने युवती को बालिका गृह में तीन दिन तक रखा। बाद में 20 फरवरी को दोबारा थाना ले जाकर महिला पुलिसकर्मियों ने पट्टे से मारपीट की, जिससे उसके कान से खून निकलने लगा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 23 फरवरी को कोर्ट ले जाकर दो लाख रुपये देने के लिए दबाव डालते हुए समझौता कराया गया और उसके मौसा से ब्लैंक चेक भी ले लिया गया। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है |
( सांकेतिक तस्वीर )

उधर,न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने संबंधित प्रकरण के मामले को लेकर विवेचना अधिकारी एवं अन्य अफसरों से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रति उत्तर नहीं प्राप्त हो सका|
उफ्फ ये गर्मी ! ये मटके ये सुराही, भीषण गर्मी का दौर…






