
रायपुर : छत्तीसगढ़ में मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का धंधा कारोबारियों के लिए फलदायक साबित हो रहा है। सुशासन की बयार के बीच ज़रूरी नहीं की, इसके लिए आपके पास वैधानिक लाइसेंस हो या न हो ? सूरते हाल यह है,कि कायदे-कानूनों को धत्ता बता कर राजधानी रायपुर में जब मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का संचालन किया जा सकता है,तो दुरुस्थ अंचलों में निजी अस्पतालों की कैसी हालत होगी? इसका अंदाज़ा सहजता से लगाया जा सकता है। राजधानी रायपुर में मेडिकल कौंसिल समेत स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के नमूने के रूप में बग़ैर वैधानिक लाइसेंस के मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन का अभूतपूर्व मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, न्यू राजेंद्र नगर स्थित मेडिशाइन हॉस्पिटल लगभग साल भर से बगैर वैधानिक लाइसेंस के संचालित हो रहा है। जबकि कानूनन, ऐसे बगैर लाइसेंस के संचालित अस्पतालों पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के दांवे भी सुर्ख़ियों में है। बताया जा रहा है, कि इस अस्पताल में भर्ती मरीज भगवान भरोसे अपना इलाज करवा रहे है। राज्य की बीजेपी सरकार के सुशासन का जादू इन मरीजों की सेहत के लिए कारगर साबित होगा या फिर मेडिकल एक्ट के तहत समुचित इलाज़ और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ मुहैया होने से मरीजों की जान बचेगी ? इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के गलियारे में ही माथापच्ची का दौर जारी है।

एक जानकारी के मुताबिक,मेडिशाइन हॉस्पिटल द्वारा हाल ही में मेडिकल लाइसेंस के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। जबकि,साल भर से यह अस्पताल बग़ैर लाइसेंस के ही संचालित बताया जाता है। यह भी बताया जाता है, कि डॉ. सुशील शर्मा और डॉ. राजेश जैन द्वारा स्थापित इस मेडिकल संस्थान की भागीदारी को लेकर विभाजन सामने आया है। बताते है, कि डॉ. राजेश जैन ने साल भर पहले ही इस संस्थान से अपनी भागीदारी अलग कर ली थी। इस अस्पताल का लाइसेंस उनके नाम दर्ज बताया जाता है।

यह भी जानकारी सामने आई है,कि नई कंपनी और संचालनकर्ता के द्वारा लाइसेंस के लिए हालिया जमा किए गए आवेदन करने के दौरान इस तथ्य का खुलासा हुआ,कि अभी तक मेडिशाइन हॉस्पिटल बगैर वैधानिक लाइसेंस के ही संचालित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अमले से जुड़े सूत्र तस्दीक करते है, कि बगैर वैधानिक लाइसेंस के सीटी स्कैन और सोनोग्राफी सेंटर का संचालन गंभीर अपराध के दायरे में है। ऐसे संस्थानों की रिपोर्ट कतई विश्वसनीय नही ठहराई जा सकती है।

उनके मुताबिक, बगैर वैधानिक लाइसेंस के ICU, डिजिटल कैथ लैब, मॉड्यूलर OT और कई विशेषज्ञ विभागों ख़ासतौर पर कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे विभागों का संचालन भी मरीजों के हितों के अनुकूल नहीं है। न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने प्रकरण को लेकर मेडिशाइन हॉस्पिटल प्रशासन से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। फ़िलहाल,बगैर वैधानिक लाइसेंस के मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन का मामला चौंकाने वाला बताया जाता है।






