
रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की गुणवत्ता ही नहीं,बल्कि कई मौकों में हकीकत से परे SOR अर्थात सड़कों के निर्माण की ऊंची दरें निर्धारित करने के मामले सुर्ख़ियों में रहे है|लेकिन,इस वित्तीय वर्ष की समापन की बेला में उन टेंडरो को लेकर गहमा गहमी तेज़ देखी जा रही है,जिसमें छत्तीसगढ़ शासन को लगभग एक हज़ार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है|

तस्दीक की जा रही है,कि भारत सरकार की गाइड लाइन के उल्लंघन और राज्य सरकार के वित्त विभाग की आपत्ति के बावजूद PMGSY ने “पूर्व नियोजित” टेंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया है| इससे ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा ख़त्म हो गई और मनमानी दरों पर सड़कों के निर्माण की नींव रख दी गई है,जारी की गई विभागीय टेंडर-निविदा सवालों के घेरे में बताई जाती है|

विभागीय जानकारों के मुताबिक,मोटा कमीशन प्राप्त करने की प्रत्याशा में मनचाही दरों पर चुनिंदा बड़े ठेकेदारों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए सुनियोजित टेंडर प्रक्रिया अंजाम दी गई है|PWD और PMGSY में सड़को के SOR में काफ़ी अंतर आंका जा रहा है| इसके मुताबिक,प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण की दरे PWD की तुलना में लगभग दोगुना दरों पर स्वीकृत की गई है |

PWD में जहाँ मूल दरों से लगभग 30 फीसदी से भी कम दरों ( Below tendar) पर टेंडर निविदा अवार्ड हो रही है,वही PMGSY में सड़क निर्माण की दरे आसमान छू रही है| इन टेंडरों में मनचाही दरों को .4 फीसद कर मोटा कमीशन निर्धारित कर दिया गया है,जारी प्रक्रिया से राज्य सरकार को बड़े राजस्व के नुक़सान का सामना करना पड़ सकता है| जबकि, उपकृत ठेकोदरों और चुनिंदा विभागीय अधिकारियों को मोटा कमीशन मिलना लगभग तय माना जा रहा है,इस अनुचित लाभांश को लगभग 1 हज़ार के आस-पास आंका जा रहा है |

एक शिकायत में कहा गया है,कि PMGSY में कार्यरत कई योग्य ठेकेदार इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल ना हो सके और ना ही वे इसके लिए EMD भर सके,इसलिए भी बड़ा खेला किया गया|बताया जा रहा है,कि कई योग्य ठेकेदारों के बिलो का भुगतान PMGSY के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सिर्फ इसलिए नहीं किया,क्योंकि उन्हें अंदेशा था,कि नियमानुसार भुगतान प्राप्त कर कई ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में शामिल होंगे और इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी|शिकायत के मुताबिक,हज़ारों करोड़ के टेंडरों में ना तो पारदर्शिता बरती जा रही है और ना ही निर्धारित नियम कायदों का पालन किया जा रहा है|अलबत्ता, चहेते ठेकेदारों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए निविदा-टेंडर की शर्तों को लचीला बना दिया गया है |

सूत्र यह भी तस्दीक कर रहे है,कि ऊंची दरों पर जिन बड़े ठेकेदारों को अनुचित लाभ दिए जाने की रूप रेखा अमल में लाई गई है,उनमे अंबिकापुर के जायसवाल फर्म को लगभग 125 करोड़,दुर्ग के एनसी नाहर कंपनी को 350 करोड़,पडोसी राज्य मध्यप्रदेश के बालाघाट के ठेकेदार कटरे कंपनी को 200 करोड़,महासमुंद स्थित बसना रत्ना खनिज के सुनील अग्रवाल को 350 करोड़,रायगढ़ के सुनील अग्रवाल कंपनी को लगभग 400 करोड़ का वर्क ऑर्डर सौंपने की विभागीय तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है| जबकि,अभी टेंडर ही अवार्ड नहीं हुआ है| शिकायत में साफ़ किया गया है,कि छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग और केंद्र सरकार के अफसरों ने भी PMGSY के अकल्पनीय “SOR” पर आपत्ति दर्ज कराई थी,लेकिन राज्य सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई| शिकायतकर्ताओं का दावा है,कि मैनेज़ टेंडर की जानकारी ENC स्तर से लेकर मंत्री जी के कर्ता-धर्ताओं के संज्ञान में है| लेकिन,उन्होंने भी वैधानिक प्रक्रिया अपनाएं जाने को लेकर अपने हाथ पीछे खींच लिए है | इस शिकायत में टेंडर शर्तों में बदलाव को लेकर ENC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएं जा रहे है |

नतीजतन,PMGSY के बेलगाम अफसरों के हौसले बुलंद बताये जाते है,महकमें में भ्रष्टाचार के टेंडर को अंजाम तक पहुंचने की कवायतें भी जोरों पर बताई जाती है| इसमें तस्दीक की जा रही है,कि विभागीय प्रमुख ने अब की बार कमीशन 8 फ़ीसदी पार का नारा बुलंद कर अपना फ़रमान सुना दिया है| फ़िलहाल, विवादों से घिरे टेंडर की पारदर्शिता सवालों के घेरे में है| इस मामले को लेकर विभागीय मंत्री से संपर्क किया गया,लेकिन वे दौरे में व्यस्त बताए गए|जबकि, PMGSY के जिम्मेदार अफसरों ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया |
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