
रायपुर : बाबा बागेश्वर के पैरों तले पड़ कर उनका आशीर्वाद पाने की होड़ देशभर में मची है। उनके कथा पंडालों में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, इनमें सरकारी कर्मचारियों,अधिकारियों से लेकर बड़ी तदाद में आम जनता भी शामिल है, मौका मिलते ही आख़िर कौन नहीं दंडवत होना चाहता, बाबा बागेश्वर के सामने। लेकिन रायपुर के एक घटना में बाबा बागेश्वर और उनका खाकी वर्दीधारी एक भक़्त सुर्ख़ियो में है।

बाबा कथा में “व्यस्त” तो भक्त लाइन अटैच में “मस्त” नजर आ रहे है,जबकि कानूनी डंडा चलाने वाली राज्य की बीजेपी सरकार ने एक कड़े फ़ैसले में साफ़ कर दिया है,कि वर्दी में भक्ति का कोई सरोकार नहीं,जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी ? अनुशासन का डंडा तो सनातनी भक्तों पर भी चलेगा,भले ही वो सामान्य शिष्टाचार के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन क्यों ना कर रहे हो ? थानेदार को वर्दी की गरिमा और अनुशासन कायम तो रखना होगा ?

भले ही संगीन अपराधों में लिप्त पुलिस के आलाधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही को लेकर बीजेपी सरकार के पैरोकारों के हाथ क्यों न कप-कंपाएं,इन प्रकरणों को लेकर पुलिस मुख्यालय भी सुस्त नजर आए ? लेकिन सरकारी ड्यूटी में तैनात रहते किसी “संत” के पैर छूना राज्य में गंभीर से गंभीर अपराधों में शामिल है,ऐसे मामलो में फ़ौरी कार्यवाही से जनता के बीच अच्छा सन्देश जाता है, यह अच्छा सन्देश इन दिनों लोगों की जुबान पर है।

आम जनता तस्दीक कर रही है, कि भ्रष्टाचार और सामाजिक अपराधों के ब्रांड एम्बेसडर पूर्व मुख्यमंत्री “भू-पे” बघेल के गिरोह में शामिल आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा, शेख आरिफ समेत अन्य के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही पर तो राज्य सरकार 2 सालों में कभी-भी सक्रिय नजर नहीं आई,लेकिन एक अदने थानेदार को चंद घंटो के भीतर ही ठिकाने लगा दिया गया। आखिर अधर्मी कौन ?

छत्तीसगढ़ में कानून का राज स्थापित है, यह बख़ूबी अपना कार्य कर रहा है, “राम राज” कैसा होगा ? “विष्णु राज” में इसकी झलक दिखने लगी है।प्रदेश में इसकी बानगी अब साफ़ -साफ़ नजर आने लगी है। रायपुर में हालिया घटित, एक वाकये ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार को चर्चा में ला दिया है। सनातनियों के बीच एक मामला लोगों की जुबान पर है। उनके मुताबिक भले ही बीजेपी हिंदुत्व का राग अलाप रही हो, सनातन की दुहाई दे रही हो,लेकिन अपने धुर विरोधियों के अरमानों पर खरी उतर रही है। उसने प्रदेश में “सर्वधर्म समभाव” से लेकर धर्म-निरपेक्षता और क़ानून का राज स्थापित होने का एक साथ बहुआयामी ‘उदाहरण’ पेश किया है।

बीजेपी सरकार के इस प्रसंग की चर्चा ‘चहुँ ओर’ हो रही है, इसे राज्य में हिंदुत्व की दिशा में साय सरकार के नए अध्यय की शुरुआत के दौर से देखा जा रहा है। दरअसल, पुलिस महकमें में तैनात एक थानेदार को सिर्फ इसलिए लाइन अटैच कर दिया गया है,क्योंकि उसने वर्दी में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पैर छू लिए थे। घटना उस वक़्त की बताई जाती है,जब कथा प्रवचन के सिलसिले में पंडित धीरेंद्र शास्त्री रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट में पहुंचे थे।

बताया जाता है, कि मौके पर मौजूद टाउन इंस्पेक्टर मनीष तिवारी ने विमान से उतरते ही पहले बाबा बागेश्वर को सैल्यूट किया और फिर जूते और बेल्ट उतारकर उनके पैर छू लिए थे। एक जानकारी के मुताबिक बतौर प्रोटोकॉल थानेदार साहब की ड्यूटी एयरपोर्ट में लगाई गई थी। बताया जाता है, कि अगुवानी के दौरान टाउन इंस्पेक्टर मनीष तिवारी सुरक्षा व्यवस्था और सामान्य शिष्टाचार के तहत मौके पर तैनात थे।

प्रदेश में बाबा बागेश्वर को आधिकारिक रूप से राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त हुआ है या नहीं ? इसकी तो जानकारी नहीं मिल पाई हैं, लेकिन रायपुर एयरपोर्ट में बाबा बागेश्वर छत्तीसगढ़ शासन के विमान से उतरते नजर आ रहे है।

एक जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से पंडित धीरेंद्र शास्त्री सरकारी विमान से रायपुर पहुंचे थे। उनके साथ तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब भी विमान से उतरते हुए नजर आ रहे हैं। मौके पर अगुवानी के लिए स्थानीय माना थाना प्रभारी मनीष तिवारी भी वीडियो में साफ़-साफ़ नजर आ रहे है। ये भी दिखाई दे रहा है, कि वर्दी में तैनात मनीष तिवारी ने अचानक अपना जूता और टोपी उतारा बाबा बागेश्वर के चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक पुलिस अधिकारी का धार्मिक श्रद्धा दिखाने का मामला गंभीर है, इसे लेकर वीडियो वायरल हुआ और विवाद खड़ा होने के अंदेशे के चलते एसएसपी महोदय ने फ़ौरी कार्यवाही के निर्देश दिए थे। हालाँकि, इस प्रकरण को लेकर किसी तरह की लिखित शिकायत प्राप्त होने की जानकारी से पुलिस सूत्रों ने इंकार किया। उधर, टाउन इंस्पेक्टर मनीष तिवारी को लाइन अटैच किए जाने के कारणों को लेकर रायपुर पुलिस द्वारा आधिकारिक रूप से कोई जानकारी सामने नहीं आई है। अलबत्ता, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि वर्दी में बाबा बागेश्वर के पैर छूने के चलते ही एसएसपी ने लाइन अटैच का फ़रमान जारी किया है ।

जानकारी के मुताबिक भिलाई में 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक हनुमंत कथा आयोजित की गई है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री सोशल मीडिया से लेकर टीवी तक छाए रहते है,उनके भक्तों की संख्या करोड़ो में है,बीजेपी के ज्यादातर नेता भी बाबा बागेश्वर के पैर छूने से पीछे नहीं रहते। सरकार की सेवा में जुटे निर्वाचित- ग़ैर निर्वाचित जनप्रतिनिधि हो या फिर संवैधानिक पदों में काबिज़ उनके समर्थक, पंडित धीरेंद्र शास्त्री की चरण वंदना करते नहीं थकते,लेकिन वर्दी में धार्मिक भक्ति का मामला अब चर्चा में है।

इसे लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी समेत बाबा बागेश्वर पर तीखा हमला किया है।पंडित धीरेंद्र शास्त्री को सरकारी विमान की सुविधा मुहैया कराने पर कांग्रेस ने इसे जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।उधर,भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा,कि कांग्रेस कभी हिंदुओं का धर्म प्रचारकों को बर्दाश्त नहीं कर पाती है। उधर,बाबा बागेश्वर के पैर छूने पर थानेदार के नपने पर आम लोग सवाल उठा रहे हैं। उनकी दलील है, कि सत्ता और सरकार के कई आधिकारिक शीर्ष और रहनुमा भी 24×7 घंटे बाबा बागेश्वर की जयजयकार में जुटे रहते है,तो उनके वर्दीधारी भक्तो पर आफ़त क्यों ? बीजेपी के हिंदुत्व और सनातनी प्रेम की चर्चा जोरो पर है।

उधर,भिलाई आयोजित हनुमंत कथा में सैकड़ों पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी में तैनात है,लेकिन इस थानेदार के नपने की घटना सामने आने के बाद वे भी बाबा बागेश्वर को दूर से “नमस्कार” करना ही मुनासिब समझ रहे है। सनातनी साधु-संतों और कथा वाचकों के वर्ग में बाबा बागेश्वर का “काम” ही नहीं बल्कि “नाम” भी सिर चढ़ कर बोलता है। बाबा बागेश्वर पर कांग्रेस बीजेपी के एजेंट होने जैसे आरोप भी लगाने में पीछे नहीं है, इस बीच सियासी बाज़ार में एक थानेदार को बाबा बागेश्वर के पैर छूना भारी पड़ गया है,फ़िलहाल थानेदार को लाइन अटैच किए जाने के कारणों का सवाल-जवाब देखना जानना -बुझना गौरतलब होगा ?







