
अगर आप छोटा घर या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केंद्र सरकार आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। नए प्रस्तावित Income Tax Rules के ड्राफ्ट में एक ऐसे बदलाव का सुझाव दिया गया है जो प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की कागजी कार्यवाही को बेहद आसान बना देगा। नए नियमों के मुताबिक, अब 20 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद-बिक्री पर PAN (परमानेंट अकाउंट नंबर) देना अनिवार्य नहीं होगा।
यह कदम Digital india और ‘Is Off Living’ की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे खास तौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है मौजूदा नियम और क्या होगा बदलाव?
वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार, यदि आप 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की कोई भी अचल संपत्ति (जैसे मकान, दुकान या जमीन) खरीदते या बेचते हैं, तो आपको ट्रांजैक्शन के दौरान अपना Pan Card नंबर देना जरूरी होता है।
लेकिन, बदलते वक्त और बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों को देखते हुए सरकार ने इस सीमा को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा है:
- पुरानी सीमा: 10 लाख रुपये से ऊपर PAN अनिवार्य।
- प्रस्तावित नई सीमा: 20 लाख रुपये से ऊपर PAN अनिवार्य।
इसका सीधा मतलब है कि 20 लाख रुपये तक के छोटे सौदों में अब आपको पैन कार्ड की जानकारी दर्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
यह बदलाव उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जो छोटे शहरों या कस्बों में सस्ती जमीन या किफायती घर (Affordable Housing) खरीदते हैं।
- छोटे खरीदार: ग्रामीण इलाकों में अक्सर जमीन की कीमतें 20 लाख के भीतर होती हैं, वहां अब कागजी उलझनें कम होंगी।
- कागजी कार्यवाही में कमी: रजिस्ट्रार ऑफिस में छोटे ट्रांजेक्शन के लिए होने वाली लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी।
- बाजार की वास्तविकता: Tax Expert का मानना है कि पिछले कुछ सालों में Real Estate की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, ऐसे में 10 लाख की पुरानी लिमिट अब व्यवहारिक नहीं रह गई थी।
सिर्फ राहत ही नहीं, निगरानी भी होगी सख्त
सरकार एक तरफ छोटे खरीदारों को छूट दे रही है, तो दूसरी तरफ बड़े और जटिल सौदों पर शिकंजा भी कस रही है। ड्राफ्ट नियमों में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी शामिल हैं:
- गिफ्ट और जॉइंट डेवलपमेंट: यदि कोई प्रॉपर्टी गिफ्ट में मिलती है या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के जरिए फ्लैट का ट्रांसफर होता है, तो अब उन्हें भी PAN के दायरे में लाने का सुझाव है (यदि वैल्यू तय सीमा से अधिक है)।
- पारदर्शिता: इसका मुख्य उद्देश्य बेनामी संपत्ति और बड़े ट्रांजेक्शन पर आयकर विभाग की पैनी नजर बनाए रखना है।
कब से लागू होंगे ये नियम?
ध्यान रहे कि ये अभी ‘ड्राफ्ट नियम’ हैं, यानी सरकार ने इन्हें सुझाव के तौर पर पेश किया है। जनता और विशेषज्ञों से फीडबैक लेने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो सकते हैं।




